![]()
हरियाणा के कैथल में 7 साल की बच्ची के दुष्कर्म-मर्डर केस में हाईकोर्ट ने दोषी पवन उर्फ मोनी की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। इस तब्दीली के साथ ही सजा में कई सख्त शर्तें जोड़ी हैं। उसे उम्रकैद की सजा तो भुगतनी ही होगी, लेकिन रिहाई तब तक नहीं होगी, जब तक वह कम से कम 50 साल की वास्तविक सजा पूरी नहीं करेगा। इसके अलावा 73 लाख का जुर्माना भी देना होगा जो पीड़ित परिवार को मुआवजे के तौर पर मिलेगा। रेप करने के बाद हत्या कर दी बता दें कि कैथल में चार साल पहले 7 साल की बच्ची से रेप करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई। वारदात के बाद सबूत मिटाने के मकसद से बच्ची की बॉडी को तेल छिड़ककर जलाने का प्रयास किया गया। घटना कैथल में कलायत एरिया के एक गांव में हुई। बच्ची का अधजला शव झाड़ियों के बीच मिला। पुलिस ने इस मामले में कुराड़ गांव के ही एक युवक पवन को गिरफ्तार कर लिया। मारी गई बच्ची दोपहर डेढ़ बजे गांव के सरकारी स्कूल के पास से लापता हो गई थी। 24 घंटे बाद दोपहर ढ़ाई बजे उसका शव अधजली हालत में गांव के खेल स्टेडियम के पास जंगल में कंटीली झांडियों के बीच मिला। शव को खुर्द-बुर्द करने के मकसद से वहां छुपाया गया था। शोर मचाने पर दबाया गला बच्ची आरोपी पवन के पास खेलने आ जाती थी। इसी का फायदा उठाकर वह बच्ची को खिलाने के बहाने स्टेडियम की तरफ ले गया और वहां उसके साथ दरिंदगी की। जब बच्ची ने शोर मचाया तो पवन ने मुंह दबाकर उसकी हत्या कर दी। उसके बाद पवन सबूत नष्ट करने के मकसद से पेट्रोल लेकर आया और उसे शव पर छिड़ककर आग लगा दी। टीमें लगाई थीं शाम को बच्ची के लापता होने की सूचना मिलते ही कैथल के तत्कालीन एसपी मकसूद अहमद ने पुलिस की कई टीमें बनाकर उन्हें सर्च में लगा दिया। सर्च के दौरान पुलिस को CCTV फुटेज मिली जिसमें एक युवक बच्ची को ले जाता हुआ नजर आया। पुलिस अधिकारियों ने लोगों को फुटेज दिखाई तो युवक की पहचान पवन के रूप में हुई जो गांव का ही रहने वाला है। बच्ची का शव मिलने के बाद पुलिस ने पवन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की प्राथमिक पूछताछ में पवन ने रेप करने के बाद बच्ची की हत्या की बात कबूल कर ली है। उसके खिलाफ कलायत थाने में आईपीसी की धारा धारा 376 (B),376A, (B),366A,302 व 201 और पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत केस दर्ज किया गया। शनिवार दोपहर डेढ़ बजे लापता हुई बच्ची इससे पहले गांव से शनिवार दोपहर डेढ़ बजे 7 साल की बच्ची के अचानक गायब हो जाने के बाद उसका परिवार अपने लेवल पर उसकी तलाश करता रहा। कई घंटे बाद भी जब बच्ची का पता नहीं चला तो पंचायत को जानकारी दी गई। मामले की गंभीरता को भापंते हुए पंचायत ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। साथ ही ग्रामीणों ने गांव में ठीकरी पहरा लगा दिया। मधुबन से बुलाए गोताखोर सर्च अभियान में सभी घरों के अलावा पुरानी बिल्डिंग्स को चेक किया गया। इसके अलावा खेल स्टेडियम से सटे 10 एकड़ से ज्यादा के जंगल का भी चप्पा-चप्पा ग्रामीणों ने छान मारा। गांव के तालाब और नहर में बच्ची को ढूंढने के लिए मधुबन से बाकायदा गोतोखारों की टीम बुलाई गई।पुलिसवाले और ग्रामीण जब खेल स्टेडियम के पास जंगल में तलाशी अभियान चला रहे थे, उसी दौरान उन्हें कंटीली झाड़ियों में बच्ची का अधजला शव पड़ा मिला। बच्ची की बॉडी झाड़ियों में इस तरह छिपाई गई थी कि सामने से उस पर किसी की नजर न पड़े। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से सबूत इकट्ठा किए हैं। बच्ची का शव कैथल जिला अस्पताल पहुंचा दिया गया और पोस्टमार्टम कराया गया। जस्टिस अनूप चितकारा की खंडपीठ ने कहा कि हालांकि सजा कम की गई है, लेकिन शर्तें कठोर हैं। फैसला इस बात का संदेश है कि कानून न केवल अपराधी को दंडित करेगा, बल्कि पीड़ित परिवार के नुकसान की भरपाई भी सुनिश्चित करेगा। कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे पीड़ित परिवार को खोजने और मुआवजा राशि उन तक पहुंचाने में पूरा सहयोग करें, ताकि न्याय केवल कागजों पर न रहकर पीड़ितों तक पहुंच सके।
Source link







