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हिसार जिले के बरवाला शहर में सीवरेज युक्त पानी की निकासी की समस्या अब आसपास के खेतों और राजकीय बागवानी नर्सरी के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। गुराना रोड के पास जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए बनाए गए पानी स्टोरेज तालाबों के ओवरफ्लो होने से पानी सड़क पार कर आसपास के खेतों और सरकारी बाग एवं नर्सरी की ओर पहुंच गया है। इससे नर्सरी के बड़े हिस्से में करीब 2 से 3 फीट तक गंदा पानी जमा हो गया है और पौधों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार, राधा स्वामी अस्पताल एवं आश्रम, हांसी रोड बरवाला के पास स्थित राजकीय बाग एवं नर्सरी करीब 25 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है। इनमें से लगभग 8 एकड़ क्षेत्र में सीवरेज युक्त पानी भर चुका है। पानी का लगातार जमाव होने के कारण नर्सरी में तैयार किए जा रहे कलमी एवं अन्य पौधों को नुकसान पहुंचने लगा है। स्थानीय निवासियों ने कहा कि यदि जल्द पानी की निकासी नहीं हुई तो बड़ी संख्या में पौधों के खराब होने की आशंका जताई जा रही है। खेतों में भी पहुंचा गंदा पानी तालाबों के ओवरफ्लो होने के बाद सीवरेज युक्त पानी आसपास के खेतों में भी पहुंच गया है। इससे खेतों में खड़ी फसलों पर भी संकट मंडराने लगा है। किसानों अनिल, सुरेंद्र, सुनील का कहना है कि लंबे समय तक गंदा पानी खेतों में जमा रहने से फसलों को भारी नुकसान हो सकता है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। हांसी-बरवाला मार्ग पर भी जलभराव नर्सरी के सामने स्थित हांसी-बरवाला मुख्य सड़क पर भी करीब 2 से 3 फीट तक पानी जमा होने की स्थिति बनी हुई है। सड़क पर पहले से कई जगह गड्ढे होने के कारण जलभराव के बाद वाहन चालकों और राहगीरों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पानी के कारण सड़क के गड्ढे दिखाई नहीं देने से हादसे का खतरा भी बना हुआ है। लोग बोले- गंदा पानी आसपास के क्षेत्र में फैल रहा ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि तालाबों से ओवरफ्लो होकर निकल रहा गंदा पानी लगातार आसपास के क्षेत्र में फैल रहा है। यदि समय रहते पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं की गई तो नर्सरी, खेतों और सड़क को और अधिक नुकसान हो सकता है। पानी निकासी की स्थायी समाधान की मांग क्षेत्रवासियों ने प्रशासन एवं संबंधित विभागों से तत्काल पानी की निकासी करवाने, ओवरफ्लो की समस्या का स्थायी समाधान करने तथा नर्सरी और खेतों को नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकारी नर्सरी में तैयार पौधे लंबे समय की मेहनत के बाद तैयार होते हैं, इसलिए उन्हें बचाने के लिए प्रशासन को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।
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