![]()
करीब 26 साल पुराने दुष्कर्म मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निचली अदालत से दोषी ठहराए गए डेरा प्रमुख बाबा धनवंत सिंह की 10 साल की कठोर कैद की सजा बरकरार रखी है। अदालत ने पीड़िता को लंबे समय तक न्याय की लड़ाई लड़ने और यौन शोषण का सदमा झेलने के चलते 6 लाख रुपए मुआवजा देने का भी आदेश दिया। या। मामला 25/26 नवंबर 2000 की रात का है। करीब 20 वर्षीय युवती पंजाब में नर्सिंग की छात्रा थी। वह अपना नर्सिंग कोर्स छोड़ने का विचार कर रही थी। उसके माता-पिता बाबा धनवंत सिंह के अनुयायी थे। परिवार चाहता था कि बेटी अपनी पढ़ाई जारी रखे, इसलिए उसकी मां उसे काउंसलिंग के लिए होशियारपुर के गांव पल्लिय़ां झिक्की स्थित नूर विश्व रूहानी चैरिटेबल ट्रस्ट के डेरे में छोड़कर गई थी। पीड़िता के आरोप के मुताबिक, इसी दौरान बाबा धनवंत सिंह ने स्थिति का कथित तौर पर फायदा उठाया और रात में उसके साथ दुष्कर्म किया। पहले धार्मिक स्तर पर इंसाफ की कोशिश मामला धार्मिक डेरे से जुड़ा होने के कारण परिवार ने पहले कुछ सिख नेताओं से संपर्क किया। उनकी सलाह पर पीड़िता और उसका परिवार मई 2001 में तत्कालीन श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी जोगिंदर सिंह वेदांती के सामने पेश हुआ। परिवार के मुताबिक, उन्हें इंसाफ का भरोसा दिया गया, लेकिन बाद में पता चला कि बाबा धनवंत सिंह को दुष्कर्म के आरोप में दोषी ठहराकर कार्रवाई नहीं की गई। परिवार के अनुसार, उन्हें नशे के सेवन और गुरमत के खिलाफ जाने के मामले में सजा दी गई थी। पुलिस शिकायत के बाद 2002 में FIR इससे निराश परिवार ने दोबारा सिख नेताओं से संपर्क किया। इसके बाद एडवोकेट नवकिरण सिंह से बाबा के खिलाफ FIR दर्ज कराने के लिए पैरवी करने का आग्रह किया गया। पुलिस को शिकायत दिए जाने के बाद महिला IPS अधिकारी वी. नीरजा ने पीड़िता से मुलाकात की और मामले के तथ्यों की पुष्टि की। इसके बाद अगस्त 2002 में बाबा धनवंत सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की गई। 2005 में 10 साल की कठोर कैद मामले की सुनवाई के बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, होशियारपुर की अदालत ने वर्ष 2005 में बाबा धनवंत सिंह को दोषी करार दिया। अदालत ने उन्हें 10 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई। बाबा धनवंत सिंह ने इसी वर्ष हाईकोर्ट में सजा के खिलाफ अपील दायर कर दी। अपील लंबित रहने के दौरान उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया था। पीड़िता ने उम्रकैद और मुआवजे की मांग की पीड़िता की ओर से भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। इसमें 10 साल की सजा को बढ़ाकर उम्रकैद करने और पीड़िता को मुआवजा देने की मांग की गई थी। मामले में एडवोकेट नवकिरण सिंह ने पीड़िता की ओर से पैरवी की। मामले की अंतिम सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने बाबा धनवंत सिंह की 10 साल की सजा बरकरार रखी। अदालत ने टिप्पणी की कि पीड़िता को आरोपी के हाथों यौन शोषण का सदमा झेलना पड़ा और उसे लंबे समय तक न्याय की तलाश करनी पड़ी। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने पीड़िता को 6 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया।
Source link







