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सुप्रीम कोर्ट ने लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम पर दी राहत।
लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम (एलएडीसीएस) को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल को राहत मिली है। भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने घोषणा की है कि सितंबर 2026 के बाद लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADCS) में नई
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यह फैसला सोमवार को उस समय सामने आया, जब पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल के नेतृत्व में पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश के बार नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित सुप्रीम कोर्ट में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ से मुलाकात की।
बार एसोसिएशन ने रखी वकीलों की चिंताएं
बैठक के दौरान बार काउंसिल और विभिन्न बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने मौजूदा एलएडीसीएस व्यवस्था को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था का स्वतंत्र रूप से वकालत करने वाले अधिवक्ताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने पहले पारित प्रस्तावों का हवाला देते हुए योजना की समीक्षा और पुनर्गठन की मांग की।
मुख्य न्यायाधीश ने दिया आश्वासन
चंडीगढ़ बार काउंसिल के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनी और उनकी चिंताओं पर सकारात्मक रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि सितंबर 2026 के बाद एलएडीसीएस में कोई नई नियुक्ति नहीं होगी। नई व्यवस्था लागू होने तक कानूनी सहायता से जुड़े मामलों का आवंटन जिला एवं सत्र न्यायाधीश संबंधित बार एसोसिएशन और पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल से परामर्श कर करेंगे।
नई योजना बनाने के संकेत
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी संकेत दिए कि सभी पक्षों से विचार-विमर्श के बाद नई योजना तैयार की जाएगी। इसमें एक ओर आम लोगों को प्रभावी और सुलभ कानूनी सहायता सुनिश्चित की जाएगी, वहीं दूसरी ओर अधिवक्ताओं के हितों और वकालत पेशे की स्वतंत्रता का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे वकीलों के हित में सकारात्मक कदम बताया। काउंसिल ने भारत के मुख्य न्यायाधीश, नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, विभिन्न बार एसोसिएशनों और उन सभी अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त किया, जिनके संयुक्त प्रयासों से यह निर्णय संभव हो सका।
बार काउंसिल ने कहा कि वह भविष्य में भी सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर ऐसी कानूनी सहायता व्यवस्था बनाने के लिए काम करेगी, जिससे आम लोगों को न्याय आसानी से मिले और वकालत पेशे की गरिमा, स्वतंत्रता तथा स्थायित्व भी सुरक्षित रहे।







