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पंजाब 2027 चुनाव से पहले पंथक राजनीति में नई हलचल:ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने दिया 35-35-30 फीसदी का फार्मूला, 30% सीटें शहादत देने वाले परिवारों




पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां अभी से तेज होने लगी हैं। फतेहगढ़ साहिब के गांव पंजोली कलां में आयोजित पंथक एकता सम्मेलन के दौरान श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने पंथक दलों से अपने आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पंथ और पंजाब के हितों की रक्षा करनी है, तो सभी पंथक धाराओं का एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरना समय की सबसे बड़ी मांग है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने सीटों के बंटवारे के लिए एक विशेष फार्मूला पेश किया। इसमें 35-35-30 का फार्मूला पेश किया। इसके तहत​ शहादत देने वाले परिवारों को मिले 30 फीसदी सीटें देने की बात कही। पंजोली कलां में दिए गए ज्ञानी हरप्रीत सिंह के इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की पंथक राजनीति में एक बड़े और निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है। तीन पॉइंट से इस फ़र्मूले को समझिए धारा 1 (प्रथम पंथक गुट): 35 प्रतिशत सीटों पर चुनाव लड़ेगी और आवश्यकता पड़ने पर अपने कोटे में से अन्य छोटे पंथक संगठनों को भी समायोजित करेगी। धारा 2 (द्वितीय पंथक गुट): 35 प्रतिशत सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारेगी। 30 प्रतिशत कोटा (विशेष प्रतिनिधित्व): शेष 30 प्रतिशत सीटें बंदी सिंहों के परिवारों तथा कौम के लिए शहादत देने वाले योद्धाओं के परिवारों को दी जाएं, ताकि उनकी कुर्बानियों को उचित सम्मान मिल सके और उन्हें विधानसभा में प्रतिनिधित्व प्राप्त हो। वैकल्पिक सुझाव: निष्पक्ष सर्वे के लिए संसदीय बोर्ड का गठन ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने एक वैकल्पिक योजना भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि यदि 35-35-30 के फार्मूले पर सहमति नहीं बन पाती है, तो सभी पंथक धड़ों की सर्वसम्मति से एक निष्पक्ष ‘संसदीय बोर्ड’ बनाया जाना चाहिए। यह बोर्ड प्रत्येक विधानसभा सीट का सर्वेक्षण करवाएगा और केवल सबसे मजबूत व जिताऊ उम्मीदवार को ही टिकट देगा। “व्यक्तिगत हित छोड़, पंथ और पंजाब के लिए आएं साथ” अपने संबोधन में पूर्व जत्थेदार ने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अब व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पीछे छोड़ने का समय आ गया है। यदि ऐसा कोई निष्पक्ष और पारदर्शी फार्मूला तैयार होता है, तो हम सभी पंथक दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को पूरी तरह तैयार हैं। यह समय व्यक्तिगत हितों का नहीं, बल्कि पंथ और पंजाब के भविष्य के लिए एकजुट होने का है।”



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