चंडीगढ़ में बैरिकेड पार करते हुए प्रदर्शनकारी।
पंजाब के खडूर साहिब से खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह और बंदी सिखों की रिहाई को लेकर निकले वारिस पंजाब दे के समर्थक आठ चौक और छह लाइट पॉइंट पार कर सीएम आवास से करीब एक किलोमीटर पहले तक पहुंच गए। इस दौरान पुलिस की बैरिकेडिंग टूटी और प्रदर्शनकारिय
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इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। पंजाब के पूर्व डीजीपी एपी पांडे के मुताबिक, यह चंडीगढ़ और मोहाली पुलिस के बीच तालमेल और ग्राउंड इंटेलिजेंस की कमी है। बड़े प्रदर्शन को संभालने की सबसे मजबूत तैयारी होनी चाहिए।
वहीं, चंडीगढ़ एसएसपी कंवरदीप कौर का कहना है कि संस्था के नेताओं के साथ पिछले एक सप्ताह से बातचीत चल रही थी, लेकिन प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ गए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग हथियार लेकर आए थे और वह नहीं चाहते थे कि माहौल खराब हो। इनके हाथियारों से जवान घायल तक हुए हैं।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन चलाया तो एक प्रदर्शनकारी ने उसका मुंह मोड़ दिया।
सबसे पहले समझिए, एक हफ्ते की तैयारी कैसे फेल हुई वारिस पंजाब दे संस्था ने सीएम पंजाब की रिहायशी का घेराव की कॉल पहले ही दे दी थी। उसी हिसाब से चंडीगढ़ व पंजाब पुलिस की जॉइंट मीटिंगें भी हुई थीं। इतना ही नहीं, दोनों ने मिलकर धरने का रूट प्लान भी तैयार किया था। इसी के चलते चंडीगढ़ पुलिस ने एक दिन पहले गऊशाला चौक पर नाकेबंदी कर ट्रैफिक एडवाइजरी जारी कर दी थी।
सूत्रों की मानें तो चंडीगढ़ और मोहाली पुलिस की मीटिंग में तय था कि इन्हें आगे नहीं जाने दिया जाएगा। कुछ प्रदर्शनकारियों को मोहाली के इलाके में रोक लिया जाएगा। लेकिन हुआ बिल्कुल विपरीत। मोहाली पुलिस उनको बॉर्डर तक छोड़कर आई। जैसे ही बॉर्डर पार किया, मोहाली पुलिस पीछे हट गई और प्रदर्शनकारी चंडीगढ़ में दाखिल हो गए।
गौशाला चौक पर टूटी पहली सुरक्षा लाइन सेक्टर-45 गऊशाला चौक पर चंडीगढ़ पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। लेकिन प्रदर्शनकारियों के मुकाबले में पुलिस बल कम था। इस चीज का अंदाजा प्रदर्शनकारियों को हो गया था। उन्होंने सबसे पहले वाटर कैनन पर कब्जा किया। उसके बाद दो मिनट में नाके तोड़ आगे बढ़ गए। फिर पुलिस लाचार नजर आई। पुलिस का पूरा फोकस मुख्यमंत्री आवास को सिक्योर करने पर लग गया था, क्योंकि रास्ते में कहीं भी बैरिकेड नहीं थे। वह आगे बढ़ते गए।

मोहाली से चंडीगढ़ की तरफ कूच करते अमृतपाल समर्थक।
नेताओं ने रोका, लेकिन भीड़ नहीं मानी पार्टी के नेताओं ने पहले भी ऐलान किया था कि वह किसी तरह का माहौल खराब नहीं करना चाहते हैं। उन्हें सिर्फ अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचानी है। लेकिन जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने गौशाला चौक पर पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़ी, नेताओं को अहसास हो गया था कि अब माहौल बिगड़ सकता है। क्योंकि युवा प्रदर्शनकारी बिना किसी लीडरशिप के तेजी से आगे बढ़ते जा रहे थे।
इसके बाद विधायक मनप्रीत सिंह अयाली हूटर बजाते हुए सबसे आगे पहुंचे और लेबर चौक पर उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनकी बात नहीं सुनी। इसके बाद सांसद अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह ने कमान संभाली। सेक्टर-20 और 21 के इनर मार्ग पर खुद बीच रास्ते में गाड़ी रोककर उसके ऊपर खड़े हो गए और माइक से आगे न बढ़ने की अनाउंसमेंट करने लगे। लेकिन तब तक 200 प्रदर्शनकारी पहले ही आगे बढ़ चुके थे। इसको देखते हुए वह भी गाड़ी से आगे बढ़े और प्रदर्शनकारियों से पहले सेक्टर-7 और 8 के चौक पर पहुंच गए। वहां पर पुलिस ने ह्यूमन चेन बना रखी थी।
फिर पुलिस ने मौके पर बदली रणनीति जब प्रदर्शनकारी बड़ी तेज गति से आगे बढ़ रहे थे, तो पुलिस को भी यह डर था कि प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री आवास तक पहुंच जाएंगे। इसके बाद पुलिस ने अपनी रणनीति बदली। आला अधिकारी मुख्यमंत्री हाउस को सिक्योर करने में लग गए और मुख्यमंत्री आवास के अधिकारियों को गंभीरता से अवगत करवाया। इसके बाद तुरंत मुख्यमंत्री के ओएसडी अमरिंदर बराड़ को सेक्टर-7/8 चौक पर ही ज्ञापन लेने के लिए बुला लिया।
यहां से सीएम आवास तीन किलोमीटर दूर था। इससे आगे का इलाका वीवीआईपी था। ज्ञापन लेने के बाद पुलिस शांत हो गई कि अब यह वापस चले जाएंगे। पुलिस ने ह्यूमन चेन तोड़कर साइड कर दी। इसी का फायदा उठाकर 50 से अधिक प्रदर्शनकारी इस चौक से विज्ञान पथ तक बढ़ गए। दो चौक क्रॉस कर वह पंजाब पुलिस हेडक्वार्टर वाले चौक पर पहुंच गए, लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या कम होती गई। पुलिस ने वहां से इन्हें मोहाली रवाना कर दिया।

अब पढ़िए पूर्व डीजीपी की अहम बातें…
- चंडीगढ़, मोहाली पुलिस की बेहतर कोऑर्डिनेशन जरूरी: पूर्व डीजीपी एपी पांडे का कहना है कि चंडीगढ़ प्रदेश की संयुक्त राजधानी है, इसलिए यहां धरने-प्रदर्शन और रैलियां होना नई बात नहीं है। लेकिन जब एक साथ बड़े स्तर पर प्रदर्शन होने वाले हों तो पुलिस को पहले से पूरी तैयारी करनी पड़ती है। सबसे जरूरी बात यह होती है कि चंडीगढ़, मोहाली और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल हो। अगर सभी एजेंसियां एक ही प्लान के तहत काम करें और कमांड साफ हो, तो ऐसी स्थिति को आसानी से संभाला जा सकता है।
- पहले से इनपुट और फोर्स की प्लानिंग जरूरी: उन्होंने कहा कि दूसरी सबसे अहम चीज मजबूत ग्राउंड इंटेलिजेंस है। पुलिस को पहले से पता होना चाहिए कि कितने लोग आने वाले हैं, किस रास्ते से आएंगे और कहां इकट्ठा हो सकते हैं। इसके साथ ही कितनी फोर्स कहां तैनात करनी है और किस अधिकारी की क्या जिम्मेदारी होगी, यह भी पहले से तय होना चाहिए।

चंडीगढ़ एसएसपी क्या बोली, तीन पॉइंट में पढ़िए…
- एक हफ्ते से मीटिंग चल रही थी: एसएसपी कंवरदीप कौर ने बताया कि हमारी पिछले एक हफ्ते से संस्था के नेताओं से बातचीत चल रही थी। यह मार्च की परमिशन मांग रहे थे। उन्हें कहा गया था कि वह हम दे नहीं सकते हैं। किसी पार्क में बैठने की अनुमति दे सकते हैं, क्योंकि मार्च से लोगों को परेशानी होती है।
- हथियार लेकर आए, हमारे जवान घायल हुए: यह अंब साहिब गुरुद्वारे में इकट्ठे हुए। हमने गौशाला चौक के पास रोकने की कोशिश की। पोस्टर लगाकर रोकने की कोशिश की। पुलिस की तरफ से प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी गई कि धारा 163 लगी हुई है। कोई कानून न तोड़े। लेकिन प्रदर्शनकारी वायलेंट हो गए। उन्होंने जबरदस्ती बैरिकेड तोड़े।
- हम सारे वीडियो देख रहे हैं: हमने रास्ते में कई बार इनके नेताओं से बातचीत की। इनका मेमोरेंडम दिलवा दिया। उन्होंने कहा कि पीसफुली प्रोटेस्ट करने की अनुमति है, उनकी मदद की जाती है। जो वेपन लेकर आए, वह गैरकानूनी है। सारे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई है। हम वीडियो की जांच कर रहे हैं।

पहले सेक्टर-43 से आगे नहीं बढ़ने दिए थे 8 फरवरी 2023 को चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर सबसे बड़ी हिंसक झड़प हुई थी, जब सिख कैदियों की रिहाई की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों ने ट्रैक्टरों और घोड़ों की मदद से पुलिस के बैरिकेड्स तोड़ दिए और पानी की बौछारें छोड़े जाने पर पुलिसकर्मियों पर तलवारों व पत्थरों से हमला कर दिया, जिसमें 30 से अधिक जवान घायल हुए। हालांकि चंडीगढ़ पुलिस ने उन्हें सेक्टर-43 से आगे नहीं बढ़ने दिया था।
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पंजाब के खडूर साहिब से खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल की रिहाई के लिए चंडीगढ़ में अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के वर्करों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी पुलिस को चकमा देते हुए CM भगवंत मान की चंडीगढ़ के सेक्टर 2 स्थित सरकारी कोठी के 1Km नजदीक तक पहुंच गए। इससे सीएम सिक्योरिटी भी हाई अलर्ट हो गई। (पढ़ें पूरी खबर)







