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करनाल जिला के गांव अमृतपुर कला में हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े समूह सखी राम मूर्ति के न्यूट्रिटिव किचन गार्डनिंग मॉडल पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें प्राकृतिक खेती अपनाने के इच्छुक 6 किसानों और 25 महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बिना रासायनिक खाद के खेती के फायदे बताए और स्थानीय स्तर पर तैयार जैविक घोल के उपयोग पर जोर दिया। हरियाणा विज्ञान मंच के राज्य कमेटी सदस्य डॉ. राजेंद्र सिंह ने राम मूर्ति को 300 गज में विकसित मॉडल न्यूट्रिटिव किचन गार्डनिंग के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल के निदेशक के मार्गदर्शन में कृषि विज्ञान केंद्र, हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और हरियाणा विज्ञान मंच के सहयोग से जिला के 20 गांवों में 31 न्यूट्रिटिव किचन गार्डन स्थापित किए जा चुके हैं। बिना रासायनिक खाद के उगा रहीं सब्जियां किसान राम मूर्ति ने बताया कि उन्होंने अपने किचन गार्डन में किसी भी तरह की रासायनिक खाद और कीटनाशक दवा का प्रयोग नहीं किया। सभी फसलों में जीवामृत और ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल किया गया है। उनके बगीचे में अमरूद, अनार, आम के साथ-साथ हल्दी, मूंगफली और शकरकंदी जैसी फसलें भी उगाई गई हैं। किसानों को मिल रहा अनुदान खंड उद्यान अधिकारी घरौंडा सुरेश गर्ग ने बताया कि उद्यान विभाग हरियाणा की ओर से किसानों को नए बाग लगाने पर तीन साल के लिए 50 हजार रुपए प्रति एकड़ अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा घीया की फसल को बांस के सहारे लगाने पर 30 हजार रुपए प्रति एकड़ और हल्दी व लहसुन की फसल पर भी 30 हजार रुपए प्रति एकड़ अनुदान दिया जा रहा है। महिलाओं को मिल रहा मुफ्त जीवामृत हरियाणा विज्ञान मंच के परियोजना निदेशक सुरेंद्र बसताड़ा ने बताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किचन गार्डन प्रोजेक्ट में शामिल महिलाएं अपने द्वारा तैयार जीवामृत गांव में किसानों और अन्य महिलाओं को नि:शुल्क दे रही हैं। राम मूर्ति ने अपने गांव की 12 महिलाओं और 3 किसानों को जीवामृत वितरित किया, जिससे अधिक लोग इस पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
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करनाल में न्यूट्रिटिव किचन गार्डनिंग मॉडल बना आकर्षण:300 गज में तैयार किया, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, 20 गांवों में 31 किचन गार्डन स्थापित







