परिवार के साथ खुशी जाहिर करते हुए आर्यन गुप्ता
“जब मैं थर्ड क्लास में पढ़ता था, तब मैंने अपनी दादी को कैंसर के कारण दम तोड़ते देखा। हमारे दादके-नानके परिवार में लगभग सभी डॉक्टर्स हैं, माता-पिता भी डॉक्टर हैं, लेकिन फिर भी हम मिलकर भी अपनी दादी को नहीं बचा पाए। दादी से मेरा काफी लगाव था और उनकी मौ
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यह कहना है लुधियाना के दुगरी के रहने वाले आर्यन गुप्ता का, जिन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक NEET-UG 2026 में 720 में से 715 अंक हासिल कर ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR-1) पर कब्जा जमाया।
आर्यन की इस ऐतिहासिक सफलता पर उनका परिवार और टीचर्स बेहद खुश हैं। आर्यन के पिता डॉ. सचिन गुप्ता एक एनेस्थीसियोलॉजिस्ट (एनेस्थिसिया के डॉक्टर) हैं और माता डॉ. रीनू गुप्ता एक गायनेकोलॉजिस्ट हैं। आर्यन ने अपनी इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी स्वर्गवासी दादी की प्रेरणा और अपने बड़े भाई के बेहतरीन मार्गदर्शन को दिया है।
उधर, आर्यन की इस कामयाबी पर दिल्ली के पूर्व सीएम और AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पोस्ट किया। केजरीवाल ने कहा-
आर्यन, NEET-UG एग्जाम में टॉप करने के लिए बधाई। तुमने पंजाब को गर्व महसूस कराया है। तुम पूरे भारत में लाखों स्टूडेंट्स के लिए एक सच्ची प्रेरणा हो। अच्छा करने वाले सभी स्टूडेंट्स को बहुत-बहुत बधाई। अपने माता-पिता, टीचर्स और देश को गर्व महसूस कराते रहो।


परिवार के साथ खुशी मनाते हुए आर्यन गुप्ता
आर्यन गुप्ता के NEET-UG टॉपर बनने की कहानी…
- दादी को खोने के बाद कैंसर स्पेशलिस्ट बनने की ठानीः आर्यन ने बताया कि तीसरी कक्षा में उनकी दादी की चौथी स्टेज के कैंसर से मौत हो गई थी। इस घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया। तभी उन्होंने कैंसर विशेषज्ञ (ऑन्कोलॉजिस्ट) बनने का संकल्प लिया, ताकि भविष्य में दूसरे परिवारों को ऐसा दर्द न सहना पड़े।
- बड़े भाई बने सबसे बड़े मार्गदर्शकः आर्यन ने बताया- बड़े भाई ने NEET 2025 में AIR-54 हासिल किया था और फिलहाल MAMC दिल्ली में MBBS कर रहे हैं। तैयारी के दौरान लगातार उनका सहयोग मिला। पढ़ाई की रणनीति, नोट्स और परीक्षा के दबाव से निपटने में भाई की अहम भूमिका रही।
- कॉन्सेप्ट क्लियर करना बनी सफलता की कुंजीः आर्यन हर सवाल का कॉन्सेप्ट पूरी तरह समझने के बाद ही आगे बढ़ते थे। उनके मेंटर के अनुसार, मुश्किल सवालों को भी वे तब तक नहीं छोड़ते थे, जब तक पूरी तरह समझ न लें। 10वीं में मैथ्स में वर्ल्ड टॉप और 12वीं में 97.2% अंक हासिल करने के बाद उन्होंने दो साल तक NEET की तैयारी की।
- री-नीट में भी नहीं टूटा हौसलाः पेपर लीक के कारण दोबारा परीक्षा होने से आर्यन पर मानसिक दबाव बना, लेकिन उन्होंने फिर से तैयारी शुरू की। दोबारा लय हासिल करने के बाद उन्होंने री-नीट में 720 में से 715 अंक हासिल किए।
- AI नहीं, किताबों और टीचर्स पर किया भरोसाः आर्यन ने तैयारी के दौरान AI या चैटजीपीटी जैसे डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने एनसीईआरटी, क्लास नोट्स और टीचर्स के मार्गदर्शन पर भरोसा रखते हुए पढ़ाई की।
- NEET अभ्यर्थियों को दी यह सलाहः आर्यन का कहना है कि सफलता के लिए खुद के प्रति ईमानदार रहना सबसे जरूरी है। अपनी कमजोरियों को पहचानकर पूरी लगन और निरंतर मेहनत करने वाले छात्रों को सफलता जरूर मिलती है।

दैनिक भास्कर से बात करते हुए आर्यन गुप्ता।
अमीर-गरीब सबको कैंसर का इलाज दूंगा
ऑल इंडिया रैंक हासिल करने के बाद आर्यन अब देश के शीर्ष मेडिकल कॉलेज से अपनी MBBS की पढ़ाई पूरी करेंगे। लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य सिर्फ एक डॉक्टर की डिग्री लेना नहीं है। आर्यन का कहना है कि वे एक बेहतरीन ऑन्कोलॉजिस्ट (कैंसर विशेषज्ञ) बनकर चिकित्सा के क्षेत्र में रिसर्च करना चाहते हैं।
वे एक ऐसा माहौल और इलाज तैयार करना चाहते हैं, जिससे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का इलाज बेहद किफायती और सुलभ हो सके, ताकि देश का चाहे कोई गरीब से गरीब व्यक्ति हो या अमीर, पैसों की कमी के कारण किसी को भी अपनी दादी की तरह तड़पकर जान न गंवानी पड़े।
गांव की बेटी सिमरन ने नीट परीक्षा में लहराया परचम
720 में से 715 अंक हासिल कर क्षेत्र का नाम किया रोशन

दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और कुछ कर दिखाने का जज़्बा हो तो गांव की गलियों से निकलकर भी देश के सर्वोच्च मुकाम तक पहुंचा जा सकता है। ऐसा ही इतिहास रचकर दिखाया है गांव नड़ेले (सिहाला) की बेटी *सिमरन रानी ने, जिसने हाल ही में घोषित नीट (NEET) परीक्षा के परिणामों में शानदार सफलता हासिल की है।
सिमरन ने 720 में से 715 अंक प्राप्त कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद गांव में खुशी का माहौल है और परिवार को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
रोजाना 12 से 13 घंटे की पढ़ाई
मीडिया से बातचीत करते हुए सिमरन रानी ने बताया कि उनके पिता जगदीप कुमार और दादा किसान हैं। सिमरन ने अपनी 11वीं और 12वीं की पढ़ाई सरकारी स्कूल से पूरी की। उन्होंने बताया कि दसवीं कक्षा के बाद उनके मामा ने उन्हें मेडिकल क्षेत्र चुनने और नीट की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने बताया कि वह रोजाना लगभग छह घंटे ऑनलाइन कक्षाएं लेने के बाद 12 से 13 घंटे स्वयं अध्ययन (सेल्फ स्टडी) करती थीं और देर रात तक पढ़ाई में जुटी रहती थीं। उन्होंने जीवविज्ञान (बायोलॉजी) और रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) के साथ-साथ कठिन माने जाने वाले भौतिक विज्ञान (फिजिक्स) विषय पर भी समय प्रबंधन के जरिए अच्छी पकड़ बनाई।
री-नीट विवाद के दौरान भी नहीं खोया हौसला
नीट परीक्षा को लेकर हुए विवाद और दोबारा परीक्षा (री-नीट) की स्थिति पर सिमरन ने बताया कि पहली परीक्षा में उनके 710 अंक बन रहे थे, लेकिन जब री-नीट की चर्चा शुरू हुई तो वह कुछ समय के लिए निराश जरूर हुई थीं। इसके बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और दोबारा पूरी मेहनत से तैयारी कर इस बार 715 अंक हासिल किए।सिमरन का सपना सरकारी मेडिकल कॉलेज से (MBBS)*की पढ़ाई पूरी कर एक सफल डॉक्टर बनना है।
बेटियों को बोझ न समझें
सिमरन ने समाज को संदेश देते हुए कहा कि आज भी कई घरों में बेटियों को आगे बढ़ने से रोका जाता है, जबकि माता-पिता को चाहिए कि वे अपनी बेटियों के सपनों को उड़ान दें। उन्होंने कहा कि परिवार और माता-पिता के सहयोग के बिना कोई भी बच्चा अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सकता।
गांव के सरपंच और परिवार ने जताई खुशी
सिमरन के पिता जगदीप कुमार न भावुक होते हुए कहा कि उनकी बेटी ने दिन-रात मेहनत कर पूरे परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वहीं गांव के सरपंच ने सिमरन की उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा, आज के समय में जहां अधिकांश बच्चे सोशल मीडिया, मोबाइल और इंस्टाग्राम रील्स में व्यस्त रहते हैं, वहीं हमारी बेटी ने मोबाइल का सही उपयोग करते हुए कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है।
हमारे पूरे इलाके के इतिहास में पहली बार किसी छात्र ने नीट जैसी कठिन परीक्षा में 720 में से 715 अंक प्राप्त किए हैं। यह पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है।”

सिमरन का मुंह मीठा करवाते परिजन और लोग।
पेपर लीक के कारण दोबारा हुई थी NEET परीक्षा
पेपर लीक के आरोपों के कारण 3 मई को हुई NEET-UG 2026 की परीक्षा रद्द हो गई थी। इसके बाद NTA ने 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई। देश और विदेश के 551 शहरों में 5,440 परीक्षा केंद्रों पर यह परीक्षा 13 भाषाओं में हुई थी।
NTA ने इस साल परीक्षा के मूल्यांकन प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया था। पहली बार मूल्यांकन के सभी चरण एक के बाद एक के बजाय समानांतर तरीके से पूरे किए। इससे तय समय पर रिजल्ट जारी किया जा सका। वहीं, पहली बार OMR शीट चैलेंज की प्रक्रिया को आंसर-की जारी करने की प्रक्रिया से अलग रखा गया।








