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गुरुग्राम में गिरते भूजल स्तर को सुधारने और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सरकारी बजट को किस तरह ठिकाने लगाया जा रहा है, इसका एक और बेहद हैरान करने वाला कारनामा सामने आया है। गुरुग्राम नगर निगम (MCG) के अधिकारियों ने केंद्र सरकार के सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक ‘कैच द रेन’ अभियान के नाम पर खानापूर्ति का मामला सामने आया है। यहां के समसपुर गांव के पॉन्ड (तालाब) पर चलाए गए वाटर हार्वेस्टिंग अभियान के तहत आयोजित जागरूकता कार्यक्रम ने निगम की जमीनी हकीकत की पोल खोल कर रख दी है। हैरानी की बात यह है कि यह फर्जीवाड़ा सिर्फ समसपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के कई अन्य इलाकों में भी इसी ढर्रे पर अभियान चलाकर फाइलों को पूरा किया जा रहा है और इस पूरे मामले पर निगम के बड़े अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। हाल ये है कि मंगलवार से ही यह अभियान शुरू किया गया और पहले दिन ही इस तरह की लापरवाही सामने आई है। 28 पॉन्ड सेलेक्ट किए दरअसल, नगर निगम की टीम को जिम्मेदारी दी गई थी कि वे शहर के आसपास 28 पॉन्ड को वाटर हार्वेस्टिंग के लिए तैयार करें और लोगों को जागरूक करें। समसपुर के ऐतिहासिक पॉन्ड और उसके आस-पास के रिहायशी इलाकों में जाकर टीम द्वारा स्थानीय ग्रामीणों, युवाओं और आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों को वर्षा जल संचयन के प्रति लोगों को यह सिखाना था कि आने वाले मॉनसून में बारिश की एक-एक बूंद को कैसे बचाना है और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को कैसे दुरुस्त रखना है। नागरिक गायब, मासूम बच्चों को जागरूक किया लेकिन जब निगम की टीम समसपुर पॉन्ड पर पहुंची, तो उन्होंने भीषण गर्मी में लोगों के घर-घर जाने या उन्हें इकट्ठा करने की जहमत ही नहीं उठाई। टीम को अपनी जिम्मेदारी निभाने से ज्यादा जल्दी सिर्फ फोटो खींचकर दफ्तर लौटने की थी। वहां तालाब के पास कुछ छोटे-छोटे और नासमझ बच्चे खेल रहे थे। अधिकारियों ने एक शर्मनाक शॉर्टकट अपनाया। उन मासूम बच्चों को, जिन्हें पानी के संकट या ‘कैच द रेन’ का मतलब भी नहीं पता था, बहला-फुसलाकर एक बड़े से सरकारी बैनर के सामने बैठा दिया गया। बच्चों को लगा कि कोई खेल हो रहा है। इसी दौरान कैमरे की फ्लैश चमकी, फोटो खींची और टीम अपनी गाड़ी में बैठकर निकल गई। कई अन्य जगहों पर भी हुआ यही खेल समसपुर पॉन्ड पर हुआ यह वाकया कोई इकलौता मामला नहीं है। सूत्रों के मुताबिक गुरुग्राम के कई अन्य वार्डों और ग्रामीण इलाकों में भी इसी तरह ‘कैच द रेन’ अभियान के नाम पर बड़ा खेल खेला गया है। कई जगहों पर तो बिना कोई कार्यक्रम आयोजित किए ही, कर्मचारियों को आम जनता बनाकर तस्वीरें खींच ली गईं और उन्हें उच्च अधिकारियों को भेज दिया गया। कागजों में चल रहा अभियान जागरूकता के नाम पर लाखों रुपये का जो बजट अलॉट हुआ था, उसे सिर्फ कागजी खानापूर्ति और बैनर-पोस्टर छपवाने में उड़ा दिया गया, जबकि जमीन पर एक भी नागरिक को वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रेरित नहीं किया जा सका। अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात नगर निगम के अधिकारियों का रवैया है। इस फर्जीवाड़े की तस्वीरें खुद निगम के ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट की गईं, जिसे देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता था कि जागरूक होने आए लोग असल में मासूम बच्चे हैं। इसके बावजूद निगम के बड़े अधिकारियों ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। अभी तक न तो संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और न ही इस फर्जी अभियान की कोई जांच बिठाई गई। आला अधिकारियों की यह चुप्पी साफ इशारा करती है कि या तो वे खुद इस पूरे खेल में शामिल हैं या फिर एसी कमरों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत देखने की उनकी कोई इच्छा ही नहीं है। हालांकि एमसीजी प्रवक्ता सतवीर रोहिल्ला का कहना है कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है, वे संबंधित अधिकारियों से बात करके ही कुछ बता पाएंगे।
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गुरुग्राम नगर निगम अधिकारियों का कारनामा:'कैच द रेन' अभियान में जनता गायब, तालाब किनारे खेलते बच्चों को बैठाकर खींच लाए फोटो







