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हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के गांव सोहड़ी निवासी अग्निवीर शंकर का सोमवार को पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा, जहां सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए और पूरे गांव में शोक का माहौल रहा। शंकर की तैनाती जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले के मंजाकोट थाना क्षेत्र स्थित तरकुंडी गली में थी। बीते शनिवार को वहां अचानक गोली चलने की आवाज सुनकर यूनिट के अन्य जवान मौके पर पहुंचे। वहां शंकर गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिले। उन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। रविवार शाम परिजनों को मिला शव घटना की सूचना मिलते ही सेना के वरिष्ठ अधिकारी और मंजाकोट थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस और सेना ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए तथा शव को कब्जे में लेकर कानूनी प्रक्रिया पूरी की। पोस्टमार्टम के बाद पार्थिव शरीर रविवार शाम को परिजनों को सौंप दिया गया। पिस्तौल साफ करते समय चली गोली परिजनों के अनुसार शंकर अपनी सर्विस पिस्तौल की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान अचानक गोली चल गई, जो उन्हें लग गई और उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में भी यही तथ्य सामने आया है। हालांकि पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं। अंतिम दर्शन उमड़े लोग सोमवार को जब शंकर का पार्थिव शरीर गांव सोहड़ी पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हो गए। पूरे गांव में गमगीन माहौल के बीच उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। ग्रामीणों ने “भारत माता की जय” और “शंकर अमर रहे” के नारे लगाए। राजपूता राइफल की एक टुकड़ी ने उन्हें सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। 16 महीने थे शेष ग्रामीणों ने बताया कि शंकर की सेवा अवधि में अभी करीब 16 महीने शेष थे। उनके पिता दीप सिंह भी भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। बेटे का पार्थिव शरीर लेने के लिए वे स्वयं राजौरी गए थे। शंकर अपने पीछे माता-पिता, एक भाई और दो बहनों को छोड़ गए हैं। पत्नी की एक माह पहले हुई थी मौत परिवार पर दुखों का पहाड़ इसलिए भी टूट पड़ा है क्योंकि उनकी पत्नी का करीब एक माह पहले ही निधन हो गया था। लगातार दो बड़े हादसों से परिवार पूरी तरह सदमे में है, जबकि पूरे गांव में शोक की लहर व्याप्त है।
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महेंद्रगढ़ के अग्निवीर शंकर को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम-विदाई:राजौरी में सर्विस पिस्तौल साफ करते समय चली थी गोली, राजपूता राइफल ने दी अंतिम सलामी







