रोहतक8 घंटे पहले
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रोहतक के पीजीआईएमएस में आयोजित मिलन समारोह में रैंप वॉक करते डॉक्टर।
रोहतक के पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के एनेस्थीसिया विभाग ने 63 साल के सफर को यादों के साथ जिया। यादों से फिर मुलाकात नाम के इस मिलन समारोह में 1963 से लेकर अब तक के करीब 200 डॉक्टर एक मंच पर एकत्रित हुए। किसी ने 20 साल बाद अपने टीचर को गले लगाया तो किसी ने 1985 बैच के साथी से हाथ मिलाकर पुरानी यादें ताजा कीं।
हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. एचके अग्रवाल ने कहा कि एनेस्थीसिया बहुत महत्वपूर्ण डिपार्टमेंट है। ओटी और आईसीयू में मरीज की सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी इसी विभाग की होती है। पूरी दुनिया में यहां से निकले डॉक्टर आज अच्छे पदों पर हैं और संस्थान का नाम रोशन कर रहे हैं। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि नई तकनीक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान की जाए।

समारोह के दौरान रैंप वॉक करते हुए डॉक्टर।
1963 में रखी थी विभाग की नींव
PGIMS के निदेशक डॉ. एस.के सिंघल ने बताया कि 1963 में डॉ. जी.एल. कामरा ने इस विभाग की नींव रखी। उस समय सिर्फ 5 फैकल्टी सदस्य थे, आज 54 फैकल्टी हैं। शुरुआती दौर में संसाधन सीमित थे, लेकिन समर्पण असीम था। आज आधुनिक ओटी, आईसीयू, पेन क्लिनिक और एडवांस मॉनिटरिंग सिस्टम हैं। कोविड काल में एनेस्थीसिया टीम ने फ्रंटलाइन पर काम किया, वह पूरे देश के लिए मिसाल है।

समारोह के दौरान रैंप वॉक करते हुए पीजीआई निदेशक डॉ. एसके सिंघल।
डॉ. किरणप्रीत बोलीं- पुराने दिन लौट आए
डॉ. किरणप्रीत ने अपने छात्र जीवन के किस्से सुनाते हुए कहा कि 1985 बैच में एमबीबीएस करने आए विद्यार्थियों में सबसे ज्यादा डॉक्टर एनेस्थीसिया विभाग में आए। आज भी सबसे ज्यादा 1985 बैच के लोग यहां आए हुए हैं। हम सब दूर हैं, पर दिल से यहीं हैं। सभी मिलकर पुराने दिन फिर से लौट आए।

समारोह के दौरान मंच पर एकत्रित हुए डॉक्टर।
डॉक्टरों का शायराना अंदाज दिखा
समारोह के दौरान वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. केएल गर्ग ने शायरी के अंदाज में डॉक्टर-मरीज के रिश्ते को समझाते हुए कहा कि कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है, मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है। डॉक्टर भी मरीज के हर दर्द को उसी तरह समझता है।








