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हरियाणा बैंक स्कैम में एक और चैट CBI तक पहुंची:IAS अफसर की गाड़ी में ₹2 करोड़ रखने का जिक्र, रिप्लाई में थंब्स-अप दिया




हरियाणा के सरकारी विभागों से जुड़े बैंक घोटाले की जांच के दौरान CBI के हाथ एक अहम वॉट्सएप चैट लगी है। सूत्रों के मुताबिक, चैट में 2009 बैच के IAS अधिकारी मनीराम शर्मा की गाड़ी में 2 करोड़ रुपए कैश रखवाने की बातचीत हुई है। दावा किया जा रहा है कि मनीराम की ओर से थंब्स-अप भी किया गया है। सूत्रों के मुताबिक, चैट में आगे लिखा गया कि सफेद रंग की एक गाड़ी में व्यक्ति कैश रख आया है। CBI अब इस चैट, संबंधित मोबाइल डेटा, लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच करा रही है। जांच एजेंसी इसे कथित कैश मूवमेंट से जुड़ा अहम इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मान रही है। मनीराम से भी इस संबंध में पूछताछ की जा चुकी है। लेबर कमिश्रर रहते फंड ट्रांसफर की जांच बैंक घोटाले के समय IAS मनीराम हरियाणा के लेबर कमिश्नर के पद पर तैनात थे। वर्तमान में वह स्वास्थ्य सचिव हैं। CBI श्रम विभाग में उनकी तैनाती के दौरान सरकारी धन को संबंधित बैंकों में भेजने की प्रक्रिया में उनकी कथित भूमिका की जांच कर रही है। इसी सिलसिले में एजेंसी उनसे एक दौर की पूछताछ कर चुकी है और अब दूसरे दौर की पूछताछ की तैयारी चल रही है। राजस्थान के रहने वाले हैं मनीराम शर्मा मनीराम शर्मा राजस्थान में अलवर जिले के बंदीगढ़ गांव के रहने हैं। उन्होंने 2005, 2006 और 2009 में UPSC एग्जाम पास किया। 2006 में उन्हें बताया गया कि सौ प्रतिशत बहरा (बधिर) होने के कारण उनका सिलेक्शन नहीं हो सकता। 2009 में मनीराम शर्मा ने एक बार फिर से हौसला जुटाया और परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने कान का ऑपरेशन कराया। आखिरकार 2009 में वह IAS अधिकारी बन गए। सबसे पहले वह नूंह में DC लगे। डिपार्टमेंट टू डिपार्टमेंट इन्वेस्टिगेशन CBI इस पूरे बैंक घोटाले की जांच ‘डिपार्टमेंट-टू-डिपार्टमेंट इन्वेस्टिगेशन मॉडल’ पर कर रही है। इसके तहत हर विभाग की फाइलें, बैंक ट्रांजैक्शन, जिम्मेदार अधिकारियों और कथित लाभार्थियों की अलग-अलग जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, CBI फिलहाल दो विभागों की जांच लगभग पूरी कर चुकी है, जबकि अन्य विभागों में जांच अभी जारी है। PMO लेवल पर मॉनिटरिंग हो रही सूत्रों के मुताबिक, इस हाई-प्रोफाइल बैंक घोटाले की मॉनिटरिंग सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) स्तर पर हो रही है। केंद्रीय जांच टीम रोजाना मामले की प्रगति से संबंधित रिपोर्ट भेज रही है। बताया जा रहा है कि सीनियर IAS अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई और पूछताछ से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों को भी केंद्रीय स्तर पर मंजूरी मिलने के बाद ही अमल में लाया जा रहा है।



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