फर्रुखनगर में करंट लगने से हुई मोर की मौत।
गुरुग्राम जिले में फर्रुखनगर के गढ़ी नत्थेखां गांव में जगमग योजना के तहत बिछाई गई 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइन राष्ट्रीय पक्षी मोरों की मौत का कारण बन रही है। ग्रामीणों का दावा है कि योजना लागू होने के बाद से अब तक क्षेत्र में दर्जनों मोरों क
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ग्रामीणों के अनुसार, गांव के मंदिर से लेकर राजीव के स्विमिंग पूल तक का क्षेत्र मोरों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। यह एक घना रिहायशी इलाका है, जहां लोग अपनी छतों पर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखते हैं। दाना चुगने के बाद उड़ान भरते समय मोर अक्सर हाई-टेंशन तारों से टकराकर करंट की चपेट में आ जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस क्षेत्र में औसतन हर महीने दो मोरों की मौत हो रही है।

मोर के शव पोस्टमार्टम रिपोर्ट की कॉपी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुई करंट लगने की पुष्टि
वन विभाग को सौंपे गए मृत मोर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी करंट लगने से मौत की पुष्टि की है। पशुपालन एवं डेयरी विभाग हरियाणा के पशु चिकित्सक डॉ. नवीन जोशी द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, मृत मोर की उम्र लगभग चार वर्ष थी। जांच में उसके पेट, आंतों और श्वास नली में गंभीर रक्तस्राव पाया गया। फेफड़ों में बिना जमा हुआ खून मिला तथा लीवर और किडनी में सूजन दर्ज की गई। रिपोर्ट में मोर की मौत का कारण स्पष्ट रूप से करंट लगना बताया गया है।
लगातार हो रही इन घटनाओं से वन्यजीव प्रेमियों और ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, वन विभाग और बिजली विभाग से मांग की है कि संवेदनशील रिहायशी क्षेत्र में हाई-टेंशन तारों को इंसुलेटेड किया जाए या उन्हें भूमिगत किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में और अधिक मोरों की जान जा सकती है।







