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खरड़ सिविल अस्पताल में दूसरी बार 'चिट्टा' सेवन का मामल:वकीलों ने उठाई SMO के तबादले की मांग, CM समेत कई अधिकारियों को भेजी शिकायत




मोहाली जिला स्थित खरड़ खरड़ के सिविल अस्पताल में दूसरी बार खुलेआम चिट्टा (हेरोइन जैसे नशीले पदार्थ) के सेवन का किया जा रहा है, ये आरोपी लगाते हुए एडवोकेट अभिषेक मल्होत्रा, ए.पी.एस. छिब्बर और तेजिंदर सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य विभाग, स्वास्थ्य निदेशक और पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग को शिकायत भेजकर सीनियर मेडिकल ऑफिसर (एसएमओ) डॉ. राजेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वकीलों ने अपनी शिकायत में कहा है कि 22 जून 2026 को सुबह करीब 7 बजे खरड़ सिविल अस्पताल के शौचालय के अंदर एक व्यक्ति द्वारा कथित रूप से चिट्टा का सेवन किया गया। इस घटना का वीडियो भी शिकायत के साथ संबंधित अधिकारियों को सौंपा गया है। नशे में टॉयलेट सीट पर गिर पड़ा शिकायत में बताया गया है कि अस्पताल के एक टॉयलेट में एक युवक कथित रूप से नशा कर रहा था। आरोप है कि नशे की अधिक मात्रा लेने के कारण वह टॉयलेट सीट पर ही बेहोश होकर गिर गया। काफी देर तक अंदर से दरवाजा नहीं खुला तो अस्पताल के स्टाफ को शक हुआ। इसके बाद एक कर्मचारी साइड से ऊपर चढ़कर अंदर झांका तो देखा कि युवक टॉयलेट सीट पर बेसुध पड़ा हुआ है। स्टाफ ने उसे कई बार आवाज लगाई, लेकिन उसकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद घटना की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई। बाद में एक व्यक्ति अंदर पहुंचा और भीतर से दरवाजे की कुंडी खोली। इसके बाद युवक को बड़ी मुश्किल से उठाकर बाहर लाया गया। उसकी हालत ऐसी थी कि वह अपने पैरों पर ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। वहीं, खरड़ सिविल अस्पताल के एसएमओ डॉ. राजेश ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अस्पताल को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में ऐसी कोई स्थिति नहीं है। किसी भी समय कोई भी वरिष्ठ अधिकारी अचानक अस्पताल का निरीक्षण कर सकता है। अधिकारी अस्पताल के स्टाफ और मरीजों से भी फीडबैक लेकर वास्तविक स्थिति की जानकारी हासिल कर सकते हैं। दूसरी बार दी शिकायत शिकायत के अनुसार, इससे पहले मई 2026 के अंतिम सप्ताह में भी अस्पताल परिसर में नशा सेवन का मामला सामने आया था। उस समय एडवोकेट अभिषेक मल्होत्रा, ए.पी.एस. छिब्बर और तेजिंदर सिंह ने ही शिकायत दी थी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने 1 जून 2026 को एसएमओ डॉ. राजेश कुमार के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। इसके बावजूद दोबारा ऐसी घटना सामने आने से अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। वकीलों का आरोप है कि पहली शिकायत के बाद भी अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई और न ही निगरानी के पर्याप्त इंतजाम किए गए। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते आवश्यक कदम उठाए होते तो दूसरी घटना को रोका जा सकता था। शिकायत में एडवोकेट अभिषेक मल्होत्रा, ए.पी.एस. छिब्बर और तेजिंदर सिंह ने इस घटना को एसएमओ की लापरवाही, कर्तव्य में कोताही और प्रशासनिक विफलता का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल के भीतर नशे का खुलेआम सेवन होना बेहद गंभीर मामला है और यह पंजाब सरकार के “युद्ध नशियां दे विरुद्ध” अभियान पर भी सवाल खड़े करता है। शिकायत में उठाई गई प्रमुख मांगें नशा सेवन करने वाले व्यक्ति के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की जाए। जांच पूरी होने तक एसएमओ डॉ. राजेश कुमार का तत्काल तबादला किया जाए। एसएमओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर निलंबन पर भी विचार किया जाए। मामले की उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए। अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जाए। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे। फिलहाल शिकायत संबंधित विभागों के पास विचाराधीन है और आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।



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