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नेहरू कॉलोनी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत फिलहाल रुकी तोड़फोड़:118 निवासियों की याचिका पर सुनवाई के बाद आदेश, अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी




फरीदाबाद में नेहरू कॉलोनी के हजारों परिवारों को सोमवार को बड़ी राहत मिली, जब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने क्षेत्र में चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। नेहरू कॉलोनी के 118 निवासियों ने अदालत में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि नगर निगम ने बिना पर्याप्त सूचना और वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए घरों को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि 30 मई से शुरू हुई इस कार्रवाई में धार्मिक स्थलों सहित सैकड़ों मकानों को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे अनेक परिवार बेघर हो गए। अदालत में उठे पुनर्वास और प्रक्रिया के सवाल याचिका में यह भी कहा गया कि प्रभावित लोगों को न तो पुनर्वास की व्यवस्था दी गई और न ही घरों से सामान निकालने का पर्याप्त समय मिला। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को होगी। कार्रवाई के डर में जी रहे थे लोग कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि पिछले कई सप्ताह से क्षेत्र में भय का माहौल था। लोगों को आशंका थी कि किसी भी समय बुलडोजर पहुंच सकता है। विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए थे। इसके चलते स्थानीय लोगों ने कई बार बैठकें और पंचायतें आयोजित कर अपनी आवाज उठाई। आरआरटीएस और एलिवेटेड रोड परियोजना से जुड़ा मामला सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरकार एनआईटी क्षेत्र में एलिवेटेड रोड और फरीदाबाद-गुरुग्राम रूट के लिए करीब 1500 करोड़ की लागत से रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम कारिडोर (आरआरटीएस) बनाने की योजना है। सूत्रों की मानें तो करीब 60 एकड़ में बसी कॉलोनी की 1.2 किलोमीटर लंबी पट्टी एलिवेटेड रोड व आरआरटीएस प्रोजेक्ट के दायरे में आती है। नगर निगम 30 मई से अभी तक इस दायरे में आने वाले करीब 300 मकान, एक मंदिर व एक मस्जिद को तोड़ चुका है। दशकों पुरानी है कॉलोनी की बसावट स्थानीय लोगों के अनुसार, नेहरू कॉलोनी में कई परिवार 1970 के दशक से रह रहे हैं। यहां रहने वाले अधिकांश लोगों के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड और मतदाता पहचान पत्र जैसे सरकारी दस्तावेज मौजूद हैं। उनका कहना है कि वर्षों से वे इसी क्षेत्र में रहकर मतदान करते आए हैं और शहर के विकास का हिस्सा रहे हैं। सरकारी जमीन पर कब्जे को मुक्त कराने के हाईकोर्ट के आदेश पर पुनर्वास विभाग ने जुलाई-2025 में कॉलोनी में जगह-जगह कई घरों पर नोटिस चस्पा कर 15 दिन में घर खाली करने का फरमान सुनाया था। इसके बाद नोटिस का काफी विरोध हुआ था। इसके बाद मामला शांत हो गया था। बेघर परिवारों के सामने रोजमर्रा की चुनौती ध्वस्तीकरण से प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनके सामने रहने, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का संकट खड़ा हो गया है। कई परिवार अस्थायी आश्रयों में रहने को मजबूर हैं। सामाजिक संगठनों की मदद से भोजन की व्यवस्था की जा रही है, लेकिन बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुनर्वास की मांग दोहराई है।



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