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पठानकोट में भट्ठा मजदूरों का डीसी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन:बकाया मजदूरी न मिलने पर रोष, समय पर अधिकारियों के न आने का आरोप




पठानकोट के तंगोशाह गांव स्थित ईंट भट्ठे के मजदूरों ने बकाया मजदूरी और हिसाब-किताब न मिलने के विरोध में जिला प्रशासनिक परिसर पहुंचकर रोष प्रदर्शन किया। लाल झंडा पंजाब भट्ठा लेबर यूनियन (सीटीयू पंजाब) के नेतृत्व में किए गए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष मजदूर शामिल हुए। मजदूरों ने भट्ठा मालिक पर सरकार द्वारा तय की गई नई मजदूरी दरें लागू न करने और शोषण करने का गंभीर आरोप लगाते हुए डिप्टी कमिश्नर (डीसी) पठानकोट को एक शिकायत पत्र सौंपा।मजदूरों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी रुकी हुई बकाया मजदूरी को तुरंत दिलवाया जाए। सरकारी समझौते और नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में भट्ठा मालिक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। 1138 रुपये रोजाना की दर देने से भट्ठा मालिक का इनकार: मजदूर प्रदर्शनकारी मजदूरों ने आरोप लगाया कि भट्ठा मालिक सुशांत अग्रवाल पंजाब सरकार द्वारा निर्धारित की गई नई मजदूरी दर 1138 रुपये प्रति दिन देने से साफ इनकार कर रहे हैं। मजदूरों का कहना था कि अब गर्मी का सीजन भी खत्म होने को आया है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उनकी मेहनत की पूरी कमाई का हिसाब नहीं दिया गया है, जिससे उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बिजली के नाम पर 3000 रुपये तक की जबरन वसूली का आरोप यूनियन नेताओं ने भट्ठा मालिकों पर एक और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि भट्ठों पर बनी झुग्गियों में रहने वाले बेहद गरीब परिवारों से मामूली बिजली उपयोग (जैसे एक पंखा या बल्ब) के बावजूद जबरन 3,000 रुपये तक के बिजली बिल वसूले जा रहे हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से इस अवैध वसूली की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। सरकारी दफ्तरों के समय और श्रम विभाग पर उठाए सवाल धरने की अगुवाई कर रहे यूनियन नेता कामरेड शिवकुमार और मनहरन ने पंजाब सरकार के प्रशासनिक दावों और श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। कामरेड शिवकुमार ने कहा कि पंजाब सरकार ने दफ्तरों का समय सुबह 7:30 बजे निर्धारित किया है, लेकिन मलिकपुर स्थित प्रशासनिक परिसर में कई विभागों के अधिकारी सुबह 10 बजे तक अपनी सीटों पर मौजूद ही नहीं थे, जिससे मजदूरों को घंटों इंतजार करना पड़ा। श्रम विभाग की लापरवाही: नेताओं ने आरोप लगाया कि लेबर इंफोर्समेंट अधिकारी मजदूरों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। जिले के कई ईंट भट्ठों और संस्थानों में श्रमिकों को सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन भी नहीं मिल पा रहा है, जिसके लिए सीधे तौर पर श्रम विभाग जिम्मेदार है। एडीसी ने दिया आश्वासन, मांगें पूरी न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी लंबे इंतजार के बाद आखिरकार एडीसी (अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर) पठानकोट ने प्रदर्शनकारी मजदूरों के बीच पहुंचकर उनकी शिकायत प्राप्त की। उन्होंने मजदूरों की समस्याओं को ध्यान से सुना और संबंधित अधिकारियों को इस मामले में जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। अधिकारियों से मिले ठोस आश्वासन के बाद मजदूरों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। हालांकि, यूनियन नेताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मजदूरों की बकाया मजदूरी का भुगतान नहीं कराया गया और उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो भविष्य में जिला मुख्यालय पर एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा और अनिश्चितकालीन पक्का धरना शुरू कर दिया जाएगा।



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