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चंडीगढ़ में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े 116 करोड़ रुपए के एफडी घोटाले के कथित मास्टरमाइंड रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वधवा ने जिला अदालत में जमानत याचिका दायर की है। वधवा ने अपनी अर्जी में दावा किया है कि जांच एजेंसी निर्धारित समय सीमा के भीतर अदालत में चालान पेश नहीं कर सकी, इसलिए उसे कानून के तहत जमानत का लाभ मिलना चाहिए। मामले में दायर याचिका पर मंगलवार को जिला अदालत में सुनवाई होगी। इस मामले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि घोटाले की राशि और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह शहर के चर्चित आर्थिक अपराधों में शामिल है। तीन महीने पहले हुई थी गिरफ्तारी विक्रम वधवा को करीब तीन महीने पहले चंडीगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार किया था। शुरुआती जांच चंडीगढ़ पुलिस द्वारा की जा रही थी, लेकिन बाद में मामले की गंभीरता और आर्थिक लेन-देन के व्यापक दायरे को देखते हुए जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई। वर्तमान में मामले की जांच सीबीआई कर रही है और एजेंसी ने इस संबंध में अदालत में चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। वधवा के वकील ने अदालत में दायर अर्जी में कहा है कि जांच एजेंसी तय समय के भीतर चालान दाखिल नहीं कर सकी। इसी आधार पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 187(3) के तहत डिफॉल्ट बेल देने की मांग की गई है। अब अदालत यह तय करेगी कि आरोपी को इस आधार पर जमानत का लाभ दिया जा सकता है या नहीं। 10 आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार सीबीआई और पुलिस जांच के दौरान इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह घोटाला सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया था, जिसमें बैंक और अन्य संस्थानों से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आई है। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने इसी तरह के तरीके से पंचकूला में भी करीब 645 करोड़ रुपए के घोटाले को अंजाम दिया था। फर्जी कंपनियों के जरिए लगाया गया सरकारी पैसा जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों ने चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड की एफडी में जमा करीब 116 करोड़ रुपए की राशि को फर्जी कंपनियों के माध्यम से रियल एस्टेट कारोबार में निवेश किया। सरकारी धन के उपयोग को छिपाने के लिए स्मार्ट सिटी के नाम पर फर्जी एफडी दस्तावेज भी तैयार किए गए थे। जांच में सामने आया कि इस पूरी साजिश का उद्देश्य धन के वास्तविक उपयोग को छिपाना और निवेश के जरिए भारी मुनाफा कमाना था। केस के अनुसार आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और स्मार्ट सिटी से जुड़े कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह घोटाला अंजाम दिया गया। आरोप है कि कई फर्जी कंपनियां बनाकर सरकारी धन को विभिन्न माध्यमों से बाजार में लगाया गया और उससे करोड़ों रुपए का लाभ कमाया गया। इस कथित घोटाले से सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा है। इसी कारण मामले को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए गृह मंत्रालय की सिफारिश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। चंडीगढ़-पंचकूला में दाखिल हो चुकी चार्जशीट सीबीआई ने पिछले महीने चंडीगढ़ और पंचकूला की जिला अदालतों में इस मामले से संबंधित चार्जशीट दाखिल की थी। एजेंसी का दावा है कि जांच के दौरान वित्तीय लेन-देन, फर्जी कंपनियों और दस्तावेजों से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए हैं। अब अदालत में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां विक्रम वधवा की जमानत याचिका पर फैसला लिया जाएगा।
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चंडीगढ़ 116 करोड़ का घोटाला-वाधवा ने लगाई जमानत याचिका:देर से चालान पेश होने का हवाला, 3 माह पहले गिरफ्तारी, 10 हुए हैं गिरफ्तार







