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HPSC HCS 2026 Prelims Result Reissue Ordered by HC


चंडीगढ़18 मिनट पहले

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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट। (प्रतीकात्मक फोटो) - Dainik Bhaskar

पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट। (प्रतीकात्मक फोटो)

हरियाणा सिविल सेवा (HCS) भर्ती-2026 की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) को बड़ा झटका दिया है। हाईकोर्ट ने आयोग को निर्देश दिए हैं कि वह भर्ती विज्ञापन की शर्तों के अनुसार प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम दोबारा तैयार कर जारी करे।

हाईकोर्ट ने माना कि आयोग ने भूतपूर्व सैनिक (ESM), दिव्यांग भूतपूर्व सैनिक (DESM) और उनके आश्रितों को दी जाने वाली प्राथमिकता का लाभ प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम में ही लागू कर दिया, जबकि यह व्यवस्था केवल अंतिम चयन प्रक्रिया के लिए निर्धारित थी। अदालत ने इसे भर्ती विज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन बताया।

अभ्यर्थी की याचिका पर सुनवाई

जस्टिस संदीप मौदगिल ने यह आदेश एक अभ्यर्थी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाकर्ता ने 26 अप्रैल 2026 को हुई HCS प्रारंभिक परीक्षा में भाग लिया था और 4 मई को घोषित परिणाम को चुनौती दी थी।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि आयोग ने उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग के दौरान विज्ञापन में तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया। साथ ही उत्तर कुंजी पर अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर भी उचित विचार नहीं किया गया।

हाईकोर्ट ने HPSC की दलील ठुकराई

सुनवाई के दौरान HPSC ने दावा किया कि परिणाम राज्य सरकार की आरक्षण नीति और भर्ती विज्ञापन के अनुरूप घोषित किया गया है। आयोग का तर्क था कि आरक्षित वर्गों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के लिए प्राथमिकता मानदंड लागू किए गए।

हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि प्राथमिकता संबंधी प्रावधान केवल अंतिम चयन सूची और नियुक्ति के समय लागू किए जाने के लिए बनाए गए हैं। प्रारंभिक परीक्षा में इनका उपयोग करना नियमों के विपरीत है।

विज्ञापन की शर्तों में बदलाव नहीं कर सकता आयोग

कोर्ट ने कहा कि आयोग ने स्वयं स्वीकार किया है कि उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग के दौरान ESM और DESM श्रेणी के लिए निर्धारित प्राथमिकता नियम लागू किए गए थे। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भर्ती विज्ञापन की धारा 17(15)(H) स्पष्ट रूप से प्रारंभिक चरण में ऐसी प्राथमिकता लागू करने की अनुमति नहीं देती। किसी नीति के उद्देश्य का हवाला देकर उसकी स्पष्ट भाषा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि HPSC जैसी संवैधानिक संस्था की जिम्मेदारी है कि वह विज्ञापन की सभी शर्तों का पालन करे। भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद आयोग अपने स्तर पर नियमों में बदलाव या नई प्रक्रिया लागू नहीं कर सकता।

उत्तर कुंजी को चुनौती देने वाली दलील खारिज

हालांकि अदालत ने अंतिम उत्तर कुंजी को चुनौती देने संबंधी याचिकाकर्ता की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने माना कि अभ्यर्थियों की आपत्तियां विषय विशेषज्ञों के पास भेजी गई थीं और विवादित प्रश्नों की दोबारा समीक्षा भी कराई गई थी। समीक्षा के बाद किसी अतिरिक्त संशोधन की आवश्यकता नहीं पाई गई।

जानें…हाईकोर्ट ने क्या आदेश दिया

हाईकोर्ट ने याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए HPSC को निर्देश दिया कि वह भर्ती विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप HCS-2026 प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम दोबारा तैयार कर घोषित करे। साथ ही स्पष्ट किया कि ESM और DESM उम्मीदवारों से जुड़े प्राथमिकता नियम केवल अंतिम चयन प्रक्रिया में ही लागू किए जा सकते हैं।

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