spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

US Court Blocks H-1B Visa Tax; Registration Drops 38% Post Fee Hike


वॉशिंगटन डीसी1 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

अमेरिका में फेडरल कोर्ट ने ट्रम्प के H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर (करीब 95 लाख रुपए) फीस वसूलने वाली नीति को रद्द कर दिया है। बोस्टन कोर्ट ने कहा कि यह फीस नहीं बल्कि एक टैक्स है और इसे लागू करने के लिए राष्ट्रपति नहीं बल्कि संसद की मंजूरी जरूरी थी।

ट्रम्प ने सितंबर 2025 में घोषणा की थी कि जो कंपनियां H-1B वीजा पर विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देंगी, उन्हें हर वीजा के लिए 1 लाख डॉलर की एक्स्ट्रा फीस देनी होगी। इसके बाद 20 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने इसे चुनौती दी थी। अब कोर्ट के फैसले के खिलाफ ट्रम्प सरकार अपील कर सकती है।

H-1B एक गैर-प्रवासी वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां कुछ समय के लिए विदेशों से हाई स्किल वाले पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं। पहले H-1B वीजा आवेदन करने पर कंपनियों को करीब 2000 से 5000 डॉलर तक फीस देनी पड़ती थी।

इस वीजा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल भारतीय IT और टेक प्रोफेशनल्स करते हैं। ऐसे में कोर्ट के इस फैसले को भारतीयों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

ट्रम्प सरकार बोली- H-1B का दुरुपयोग हो रहा

ट्रम्प सरकार ने अदालत में दलील दी थी कि H-1B सिस्टम का दुरुपयोग हो रहा है। सरकार के मुताबिक कई कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की जगह कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को रख रही थीं। ऐसे में यह फीस टैक्स नहीं बल्कि एक तरह का आर्थिक दंड है।

सरकार ने कहा कि इमिग्रेशन कानून के तहत राष्ट्रपति को विदेशी नागरिकों की एंट्री सीमित करने का अधिकार है। लेकिन कोर्ट इस दलील से सहमत नहीं हुई।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने 19 सितंबर 2025 को H-1B वीजा को लेकर नियमों में बदलाव से जुड़े ऑर्डर पर साइन किया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने 19 सितंबर 2025 को H-1B वीजा को लेकर नियमों में बदलाव से जुड़े ऑर्डर पर साइन किया था।

सरकार ने माना- फीस बढ़ने के बाद आवेदन घटे

ट्रम्प सरकार के फीस बढ़ने का असर वीजा आवेदनों पर भी पड़ा। US सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (USCIS) के आकड़ो के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 के लिए H-1B रजिस्ट्रेशन में 38.5% की गिरावट आई। यह संख्या 3.44 लाख से घटकर 2.11 लाख रह गई।

अमेरिकी सरकार ने खुद कोर्ट में माना था कि फीस बढ़ने के बाद H-1B वीजा के आवेदन तेजी से घटे हैं। मार्च में प्रशासन ने बताया था कि 15 फरवरी तक सिर्फ 85 लोगों ने ही नई फीस जमा की थी।

H-1B प्रोग्राम के तहत हर साल 65,000 वीजा जारी किए जाते हैं। इसके अलावा एडवांस डिग्री वाले विदेशी प्रोफेशनल्स के लिए और 20,000 वीजा दिए जाते हैं। यह वीजा आमतौर पर 3 से 6 साल के लिए मंजूर होता है।

भारत पर सबसे ज्यादा असर पड़ा था

ट्रम्प सरकार के इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ा था। बड़ी संख्या में भारतीय IT प्रोफेशनल्स H-1B वीजा के जरिए अमेरिका में काम करते हैं। AI की वजह से टेक सेक्टर में छंटनी और नए इमिग्रेशन नियमों के कारण विदेशी कर्मचारियों की भर्ती पहले ही धीमी हो चुकी थी।

इस बीच कई भारतीय कर्मचारियों की नौकरी चली गई। अमेरिकी नियमों के मुताबिक नौकरी जाने के बाद नए रोजगार के लिए सिर्फ 60 दिन का समय मिलता है। नौकरी नहीं मिलने पर कई भारतीयों को वापस लौटना पड़ा।

जयशंकर ने भी उठाया था मुद्दा

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसी साल मई में यह मामला अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के सामने उठाया था। रुबियो ने माना था कि नए इमिग्रेशन सिस्टम में बदलाव के दौरान कुछ दिक्कतें और तनाव हो सकते हैं।

हालांकि उन्होंने कहा था कि अमेरिका इमिग्रेशन सिस्टम को ज्यादा प्रभावी बनाने की कोशिश कर रहा है और लंबे समय में इसका फायदा सभी पक्षों को मिलेगा। रूबियो ने यह भी कहा था कि यह कदम खासतौर पर भारत को निशाना बनाकर नहीं उठाया गया है।

उनके मुताबिक अमेरिका पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर अवैध प्रवास की समस्या से जूझ रहा है। 20 मिलियन से ज्यादा लोग गैरकानूनी तरीके से अमेरिका में दाखिल हुए और उसी चुनौती से निपटने के लिए यह बदलाव किए जा रहे हैं।

————————-

H-1B वीजा से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

अमेरिका में 15 हजार भारतीयों की छंटनी, नई जॉब नहीं:H-1B पर गए थे, ट्रम्प के सख्त नियम से अब डिपोर्ट का खतरा

अमेरिका में 15 हजार भारतीय टेक कर्मियों की नौकरी जाने के बाद उनके सामने संकट खड़ा हो गया है। अब उनपर डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, ये सभी एच-1बी वीजा पर अमेरिका गए थे, लेकिन छंटनी के बाद इनके पास नई नौकरी ढूंढने व वीजा स्टेटस बचाने के लिए सीमित समय बचा है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Popular Articles