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चंडीगढ़ CBI ने कालका रेलवे स्टेशन का क्लर्क पकड़ा:पहले 14 हजार, बाद में 10 हजार में सौदा,74 हजार का भत्ता पास करवाना था




चंडीगढ़ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कालका रेलवे स्टेशन के एक क्लर्क को सेवानिवृत्त कर्मचारी के लंबित भत्ते की राशि जारी करने के बदले 10 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान कालका रेलवे स्टेशन पर तैनात क्लर्क रजनीश के रूप में हुई है। CBI ने उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है। CBI में दर्ज एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता हिमांशु सिंह ने 29 मई 2026 को शिकायत दी थी। हिमांशु मूल रूप से उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के मनोहर विहार का निवासी है और वर्तमान में मोहाली के साईं माजरा में रह रहा है। शिकायत में उसने बताया कि उसके पिता सुंदर 31 अगस्त 2023 को हिमाचल प्रदेश के टकसाल रेलवे स्टेशन से ट्रैकमैन पद से सेवानिवृत्त हुए थे। अप्रैल में पता चला था बकाया भत्ते का शिकायत के अनुसार, अप्रैल 2026 में परिवार को जानकारी मिली कि पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात कर्मचारियों को टफ लोकेशन अलाउंस (टीएलए) का बकाया भुगतान किया जा रहा है। हालांकि उसके पिता को यह राशि नहीं मिली थी। इसके बाद 18 अप्रैल 2026 को टीएलए के बकाया भुगतान के लिए वरिष्ठ सेक्शन इंजीनियर (पी-वे) कार्यालय, कालका रेलवे स्टेशन में आवेदन दिया गया। जब लंबे समय तक भुगतान नहीं हुआ तो हिमांशु ने 4 मई 2026 को कालका रेलवे स्टेशन के क्लर्क रजनीश से फोन पर संपर्क किया। रजनीश ने उसे अगले दिन कार्यालय आने के लिए कहा। 74 हजार का बकाया बताकर मांगे 14 हजार एफआईआर के मुताबिक, 5 मई 2026 को हिमांशु कालका रेलवे स्टेशन स्थित कार्यालय पहुंचा। वहां क्लर्क रजनीश ने बताया कि उसके पिता के लगभग 74 हजार रुपए के टीएलए बकाया हैं। उसने कहा कि इस राशि को जारी करवाने के लिए जरूरी कागजी कार्रवाई उसी के जिम्मे है। आरोप है कि इसके बाद रजनीश ने बकाया राशि जारी करने के बदले 14 हजार रुपए रिश्वत की मांग की। जब हिमांशु ने इतनी रकम देने में असमर्थता जताई तो आरोपी ने रिश्वत की रकम घटाकर 10 हजार रुपए कर दी। साथ ही चेतावनी दी कि यदि रिश्वत नहीं दी गई तो टीएलए का बकाया भुगतान जारी नहीं किया जाएगा। बातचीत की रिकॉर्डिंग में भी सामने आई मांग CBI ने शिकायत मिलने के बाद मामले का सत्यापन कराया। 1 जून 2026 को CBI के सब-इंस्पेक्टर मनीष कौशिक ने शिकायत की जांच की। जांच के दौरान हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग में भी आरोपी द्वारा 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगने की बात सामने आई। साथ ही उसने रिश्वत की रकम कम करने से भी इनकार कर दिया। CBI का कहना है कि शिकायत और सत्यापन के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया यह साबित हुआ कि आरोपी क्लर्क ने सरकारी काम करने के बदले अवैध रूप से रिश्वत की मांग की थी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद CBI की एंटी करप्शन ब्रांच, चंडीगढ़ ने रजनीश के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7 के तहत नियमित मामला दर्ज किया।



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