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सिनेमा बेहतरीन जरिया है युवाओं को पंजाबी इतिहास और योद्धाओं के जीवन से जोड़ने के लिए। पंजाबी सिनेमा अब उस दौर में पहुंच भी गया, जहां इतिहास को भव्य तरीके से दिखाया जा सके। ऐसे में जितनी भी फिल्में बने वो बेहतर है। यह कहा एक्टर जरनैल सिंह ने। वह मोहाली सेक्टर-67 में एक प्रोमोशनल इवेंट में पहुंचे। उन्होंने कहा – विश्व में कितनी ही घटनाएं हुई, इसमें हिटलर से लेकर 1947 का विभाजन भी है। इस पर कितनी ही फिल्में बनी, तो ऐसे में हमें भी इससे सीखना है। हां, ये अंतर रहना चाहिए कि सामाजिक सीख देना सिनेमा का हिस्सा है, जिसे मनोरंजन के साथ परोसना सिनेमाई भाषा के लिए जरूरी होता है। हम गुरु घर जाते हैं, वहां भी हमें अपने गुरु का दिया ज्ञान मिलता है। ऐसे में वहां की शुद्धता और पवित्रता वैसी ही रहेगी, मगर फिल्म में ये छूट मिलनी चाहिए कि इतिहास को सत्यता के साथ मनोरंजन के साथ दिखाया जा सके। जरनैल ने कहा – पंजाब में कई योद्धा ऐसे हुए हैं जिन्होंने समय-समय पर एक नई सीख दी है। हुकूमत की बात करें तो महाराजा रणजीत सिंह को दुनिया भर में जाना जाता है, ऐसे योद्धाओं पर फिल्म बननी चाहिए और उनकी वीरता को बड़े रूप में दिखाना भी चाहिए। ऐसे ही सिकंदर महान जो दुनिया जीतने निकला था वह आखिर सतलुज की नदी को पार नहीं कर पाया। ऐसा इसलिए क्योंकि उसे पंजाबी योद्धा मिल गए थे। ऐसी बातें जो इतिहास में बहुत छुपाकर रखी गई, उसे फिल्म का रूप में देना कितना जरूरी है। एक्शन के साथ रिएक्शन भी जरनैल ने कहा – कुदरत भी एक एक्शन के साथ रिएक्शन की बात करती है, तो पंजाब में इसका असल उदाहरण देखने को भी मिलता है। यहां के लोग प्यार से जीते जा सकते हैं, ताकत से ये बेहद ही मुश्किल काम है। ऐसा नहीं है कि कोई अणख की बात है, मगर ये कौम ही हमेशा हिंदुस्तान के लिए सबसे पहले लड़ती आई है। वर्तमान में पंजाब का किसान भी एक अलग लड़ाई लड़ रहा है। किसानों को कुछ रुपए देकर उनसे जमीनें ले ली जाती हैं, उन्हें भी पता नहीं होता कि पैसों का क्या करें? कुछ दिनों में ये पैसा खत्म हो जाता है और किसान फिर वहीं आ जाता है। ये मुद्दे ऐसे हैं जिन्हें सिनेमा तक आना जरूरी है।
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पंजाबी इतिहास और योद्धाओं पर ज्यादा फिल्में बननी चाहिए







