राज्य सूचना आयोग ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि कोई को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी भले ही खुद को निजी संस्था बताए, पर वह अपनी जनरल बॉडी मीटिंग की वीडियोग्राफी या रिकॉर्ड देने से इनकार नहीं कर सकती। जो जानकारी रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसाइटी जैसी सरकारी अथॉरिटी किसी कानून के तहत मांग सकती है, वह आरटीआई के तहत आम नागरिक को भी मिलनी चाहिए। राज्य की करीब 32 हजार पंजीकृत सोसायटियों पर यह फैसला लागू होगा। यह मामला आईएएस व अन्य अफसरों से जुड़ी पंचकूला की ‘द न्यू हरियाणा ऑफिसर्स को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसायटी’ का है। रिटायर्ड सेशन जज और हरियाणा मानवाधिकार आयोग के सदस्य कुलदीप जैन ने सोसायटी की 8 जुलाई 2023 की जनरल बॉडी मीटिंग की बिना एडिटिंग वाली वीडियो रिकॉर्डिंग मांगी थी। सोसायटी ने इसे निजी संपत्ति बताते हुए जानकारी देने से मना कर दिया था।सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने कहा कि आरटीआई अधिनियम में सूचना का दायरा बेहद व्यापक है। आयोग ने रजिस्ट्रार कार्यालय के एसपीआईओ को निर्देश दिया है कि वे अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सोसायटी से वीडियो प्राप्त करें और 30 दिनों में अपीलकर्ता को सौंपें। आदेश न मानने पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। फैसले के बड़े मायने {पारदर्शिता: अब हाउसिंग सोसायटियों की बंद कमरों में होने वाली बैठकों की हेराफेरी पकड़ी जा सकेगी। क्योंकि कई बार सभी को जानकारी नहीं मिलती। रजिस्ट्रार तक भी दी जाती है। {जवाबदेही: प्रबंध समितियां अब यह कहकर नहीं बच सकेंगी कि वे आरटीआई के दायरे में नहीं आतीं। जो रिकॉर्ड रजिस्ट्रार के पास जाएगा, वह कोई भी ले सकेगा। {सदस्यों का हक: सोसायटी के हर सदस्य को अब बैठकों की वास्तविक रिकॉर्डिंग देखने का कानूनी अधिकार मिल गया है। अब तक पदाधिकारी तक रिकॉर्ड सीमित रहता था। अपीलकर्ता ने आरटीआई के तहत 5 सितंबर, 2023 को रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां के पास आवेदन किया। जिसमें उसने द न्यू हरियाणा ऑफिसर्स कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड, पंचकूला की 8 जुलाई, 2023 को हुई आम सभा की बैठक की पूरी कार्यवाही का प्रमाणित प्रतिलिपि मांगी। प्रथम अपील तक जानकारी नहीं मिली तो मामला 7 अगस्त, 2024 को द्वितीय अपील सूचना आयोग पहुंचा। यहां तत्कालीन सूचना आयुक्त ज्योति अरोड़ा व सूचना आयुक्त एसएस फूलिया की पीठ में सुनवाई भी चली, पर निपटारा नहीं हुआ। इस बीच द न्यू हरियाणा ऑफिसर्स को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी की अध्यक्ष रेनू फूलिया ने बात रखी कि सोसाइटी निजी है। जमीन और फ्लैटों की लागत इसके सदस्यों ने स्वयं के संसाधनों से वहन की थी। सोसाइटी आरटीआई अधिनियम के तहत परिभाषित ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ नहीं है। इसलिए, वह मांगी गई जानकारी देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। इसी माह 12 मई को मामले की सुनवाई नव नियुक्त राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा की पीठ द्वारा की गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 20 मई को फिर सुनवाई हुई। अब मामले में निर्णय आया है। सभी दलीलें सुनने के बाद यह आयोग निर्णय दिया कि अपीलकर्ता द्वारा मांगी गई जानकारी सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार के पास उपलब्ध है और सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत इसे उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है। रजिस्ट्रार, सहकारी समितियों के कार्यालय के एसपीआईओ को निर्देश दिया जाता है कि वे प्राप्त वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए संबंधित समिति से आवश्यक जानकारी प्राप्त करें और इस आदेश की प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर अपीलकर्ता 8 जुलाई, 2023को हुई आम सभा की बैठक की उपलब्ध संपूर्ण, बिना किसी काट-छांट के वीडियोग्राफी की एक प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराएं।
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32 हजार निजी को-ऑपरेटिव सोसाइटियों का रिकॉर्ड भी आरटीआई के दायरे में







