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3 IAS अफसरों की 6 शहरों में प्रॉपर्टी:हरियाणा में IDFC बैंक घोटाले में फंसे, किराए से लाखों की कमाई, सैलरी भी बढ़ी




हरियाणा के सरकारी विभागों से जुड़े IDFC बैंक घोटाले की जांच के दायरे में आए तीन IAS अधिकारियों की संपत्तियों और आय का ब्योरा सामने आया है। CBI 6 जून की रात विनीत गर्ग, पंकज अग्रवाल और मोहम्मद शाइन के ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। इन अधिकारियों के इमूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न (IPR) के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच इन्होंने कोई नई अचल संपत्ति नहीं खरीदी। हालांकि, इनकी संपत्तियां पंचकूला, गुरुग्राम, नई दिल्ली, मोहाली, धनबाद और चंडीगढ़ समेत छह शहरों में हैं। इस दौरान कुछ संपत्तियों की कीमत बढ़ी है, किराए से आय में इजाफा हुआ है और वेतन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कथित बैंक फ्रॉड के समय मोहम्मद शाइन हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL)के मैनेजिंग डायरेक्टर, पंकज अग्रवाल कृषि विभाग के प्रशासनिक सचिव और विनीत गर्ग हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव थे। हालांकि, CBI ने अभी तक यह नहीं बताया है कि इस मामले में इन अधिकारियों की क्या भूमिका है और छापेमारी के दौरान क्या बरामद हुआ। CBI ने IFS अधिकारी नवनीत कुमार श्रीवास्तव के ठिकानों पर भी छापेमारी की थी। वह चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) के CEO रह चुके हैं। आइए जानते हैं तीनों IAS की संपत्तियों, आय और वेतन का ब्योरा… विनीत गर्ग: फ्लैट की कीमत 90 लाख बढ़ी, किराए से 24.50 लाख सालाना कमाई ACS विनीत गर्ग की संपत्तियों की संख्या साल 2024 और 2026 में छह ही रही। इस दौरान उन्होंने कोई नई जमीन, मकान या फ्लैट नहीं खरीदा। हालांकि, पंचकूला के एमडीसी सेक्टर-2 स्थित उनके फ्लैट की कीमत जरूर बढ़ी है। 2024 में इसकी कीमत 2.30 करोड़ रुपए थी, जो 2026 में बढ़कर 3.20 करोड़ रुपए हो गई। यानी दो साल में इसकी वैल्यू करीब 90 लाख रुपए बढ़ गई। किराए से होने वाली कमाई में भी इजाफा हुआ है। गुरुग्राम के फ्लैट से मिलने वाला सालाना किराया 4.80 लाख रुपए से बढ़कर 5.50 लाख रुपए हो गया। वहीं, दिल्ली के रोहिणी स्थित फ्लैट से किराया 4 लाख रुपए से बढ़कर 5 लाख रुपए सालाना हो गया। इसके अलावा पंचकूला सेक्टर-7 के मकान से उन्हें हर साल 14 लाख रुपए किराया मिलता है। इस तरह उनकी कुल सालाना किराया आय 24.50 लाख रुपए है। हालांकि, उनकी बेसिक सैलरी में कोई बदलाव नहीं हुआ। 2024 में भी उनका मूल वेतन 2.25 लाख रुपए था और 2026 में भी उतना ही है। पंकज अग्रवाल: अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट में 45 लाख रुपए ज्यादा लगाए 2000 बैच के IAS अधिकारी पंकज अग्रवाल ने भी पिछले दो साल में कोई नई संपत्ति नहीं खरीदी। उन्होंने कुल तीन संपत्तियां घोषित की हैं। इनमें सबसे बड़ा बदलाव पंचकूला के एमडीसी सेक्टर-2 स्थित द हाइलैंड्स सोसाइटी के अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट में देखने को मिला। इस फ्लैट के लिए उनका भुगतान 1.14 करोड़ रुपए से बढ़कर 1.59 करोड़ रुपए हो गया। यानी दो साल में उन्होंने इसमें करीब 45 लाख रुपए और लगाए। इसके अलावा झारखंड के धनबाद में पैतृक मकान में उनकी आधी हिस्सेदारी है। मोहाली में IAS-PCS को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी का एक प्लॉट भी उनके नाम पर है। उनकी बेसिक सैलरी भी बढ़ी है। 2024 में उनका मूल वेतन 1.93 लाख रुपए था, जो 2026 में बढ़कर 2.11 लाख रुपए हो गया। मोहम्मद शाइन: संपत्तियों में कोई बदलाव नहीं, वेतन बढ़ा 2002 बैच के IAS अधिकारी मोहम्मद शाइन की संपत्तियों में पिछले दो साल के दौरान कोई बदलाव नहीं हुआ। उन्होंने न कोई नई संपत्ति खरीदी और न ही पुरानी संपत्तियों की कीमत में कोई बदलाव दिखाया। उनके पास पंचकूला की हाइलैंड्स सोसाइटी में 2.27 करोड़ रुपए कीमत का एक फ्लैट है। इसके अलावा मोहाली में 500 वर्ग गज का एक प्लॉट है, जिसकी मौजूदा कीमत 70 लाख रुपए बताई गई है। वहीं, चंडीगढ़ के सेक्टर-11 में दूसरी मंजिल पर उनका एक मकान भी है, जिसकी कीमत 1.10 करोड़ रुपए है। चंडीगढ़ वाले मकान से उन्हें हर साल 27 लाख रुपए किराया मिलता है। यह आय 2024 और 2026 दोनों में समान रही। हालांकि, उनकी बेसिक सैलरी बढ़ी है। 2024 में उनका मूल वेतन 1.72 लाख रुपए था, जो 2026 में बढ़कर 1.82 लाख रुपए से ज्यादा हो गया। दो एजेंसियां घोटाले की जांच कर रहीं IDFC बैंक घोटाले की जांच फिलहाल CBI और ED कर रहे हैं। CBI इस मामले में पहले ही 13 लोगों और दो फर्जी संस्थाओं के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों के करोड़ों रुपए फर्जी एफडीआर के जरिए बैंकिंग सिस्टम में घुमाए गए और बाद में अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए। जांच के दायरे में आए अधिकारियों में मोहम्मद शाइन, पंकज अग्रवाल, विनीत गर्ग, आर.के. सिंह, प्रदीप कुमार, मनीराम शर्मा, संकेत कुमार और डॉ. वैभव शर्मा के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। हरियाणा सरकार इन अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत जांच की अनुमति पहले ही दे चुकी है। अब CBI की नजर ऐसे अधिकारी पर है, जो सरकारी गवाह बनकर पूरे घोटाले की परतें खोल सकता है।



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