पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि यदि किसी ड्राइवर ने लाइसेंस की अवधि समाप्त होने से पहले उसके नवीनीकरण के लिए आवेदन कर दिया था, लेकिन कोविड-19 के दौरान सरकारी कार्यालयों में कामकाज प्रभावित होने के कारण लाइसेंस समय पर रिन्यू नहीं हो सका, तो इसका नुकसान ड्राइवर को नहीं उठाना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में ड्राइवर को वैध लाइसेंसधारी माना जाएगा और बीमा कंपनी मुआवजा देने से इनकार नहीं कर सकती। जस्टिस पंकज जैन ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील का आंशिक रूप से निपटारा करते हुए कर्मचारी मुआवजा आयुक्त के आदेश को अधिकांश रूप से बरकरार रखा। हालांकि, अदालत ने ब्याज की गणना में संशोधन किया और कहा कि 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दुर्घटना की तारीख से नहीं, बल्कि दुर्घटना के 30 दिन बाद से देय होगा। अब 4 पॉइंट में समझें मामला:- ब्याज को लेकर आदेश में संशोधन हालांकि, अदालत ने बीमा कंपनी की इस दलील को स्वीकार कर लिया कि कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत ब्याज दुर्घटना की तारीख से नहीं, बल्कि उसके 30 दिन बाद से देय होता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने आदेश में संशोधन करते हुए निर्देश दिया कि मुआवजा राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दुर्घटना के 30 दिन बाद से वास्तविक भुगतान होने तक दिया जाए।
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