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सोनीपत में किसानों ने नहर में लगाई जल समाधि:नहर की सफाई व पानी की मांग को लेकर प्रोटेस्ट; आश्वासन पर खत्म हुआ प्रदर्शन




सोनीपत के गोहाना क्षेत्र में धान की फसल के लिए सिंचाई का संकट गहराने पर किसानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। नहरों की लंबे समय से सफाई नहीं होने और समय पर पानी की आपूर्ति बंद रहने से परेशान किसानों ने भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के बैनर तले पहले एसडीएम कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। जब प्रशासन की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं मिला तो किसान सीधे आहुलाना गांव के पास बुटाना डिस्ट्रीब्यूटरी माइनर पर पहुंच गए। यहां पांच किसानों ने नहर के पानी में बैठकर जल समाधि जैसा विरोध शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि धान की रोपाई का समय निकलता जा रहा है, लेकिन नहरों में पानी नहीं छोड़ा जा रहा, जिससे फसलें प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। सूचना मिलते ही नहरी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों के आश्वासन के बाद किसानों ने अपना विरोध समाप्त कर नहर से बाहर आना स्वीकार किया, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। धान सीजन में पानी नहीं मिलने से किसानों का फूटा गुस्सा मानसून के दौरान जहां प्रदेश के कई हिस्सों में जलभराव की समस्या बनी हुई है, वहीं गोहाना क्षेत्र के किसान नहरों में पानी नहीं आने से परेशान हैं। किसानों का आरोप है कि बुटाना डिस्ट्रीब्यूटरी माइनर की लंबे समय से सफाई नहीं कराई गई है। सिल्ट और गाद जमा होने के कारण पानी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इसका असर आहुलाना, मदीना, कथूरा, छिछड़ाना समेत कई गांवों पर पड़ रहा है, जहां किसानों को सिंचाई के साथ-साथ पीने के पानी की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन, नहीं मिला समाधान तो नहर में उतरे किसान किसानों ने बताया कि करीब पंद्रह दिन पहले उन्होंने एसडीएम को ज्ञापन देकर नहर की सफाई और पानी छोड़ने की मांग की थी। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज किसानों ने भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के नेतृत्व में लघु सचिवालय पहुंचकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जब वहां भी कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला तो किसान सीधे आहुलाना गांव के पास बुटाना डिस्ट्रीब्यूटरी माइनर पर पहुंच गए और पांच किसान विरोध स्वरूप नहर के पानी में बैठ गए। जल विरोध की सूचना मिलते ही हरकत में आया नहरी विभाग किसानों के नहर में बैठने की सूचना मिलते ही नहरी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों से बातचीत की और जल्द नहर की सफाई करवाने तथा सिंचाई के लिए पानी छोड़ने का भरोसा दिया। प्रदर्शन का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्यवान नरवाल ने किया। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगें पूरी तरह जायज हैं और प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। किसानों ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना है कि यदि जल्द नहरों की सफाई कर नियमित रूप से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि धान की फसल के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण समय है और यदि इसी दौरान पानी नहीं मिला तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों ने स्पष्ट किया कि आंदोलन के आगे बढ़ने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी। आश्वासन के बाद नहर से बाहर आए किसान नहरी विभाग के अधिकारियों द्वारा जल्द कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद किसानों ने अपना जल विरोध समाप्त कर नहर से बाहर आना स्वीकार किया। हालांकि किसानों का कहना है कि अब वे केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीन पर कार्रवाई देखना चाहते हैं। फिलहाल प्रशासन ने समस्या के समाधान का भरोसा दिया है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि धान के सीजन में किसानों को समय पर सिंचाई का पानी कब मिलेगा। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।



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