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सोनीपत कोर्ट ने रेपिस्ट को सुनाई 20 साल की सजा:किशोरी को बहलाकर हरिद्वार लेकर गया; 55 हजार का जुर्माना लगाया




सोनीपत की कोर्ट ने रेप मामले में दोषी को 20 साल की सजा सुनाई है। दोषी करीब डेढ़ साल पहले नाबालिग किशोरी को शादी की नीयत से भगाकर ले गया था। मामले में सोनीपत की नरेंद्र सिंह की फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कुल 55 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इसमें से 40 हजार रुपये पीड़िता को मानसिक पीड़ा के लिए मुआवजे के रूप में देने के आदेश दिए गए हैं। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। मामला क्या था सोनीपत के शहर गोहाना थाना क्षेत्र में शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि उसकी 14 वर्षीय बेटी 13 नवंबर 2024 की शाम घर से लापता हो गई। आरोप लगाया गया कि पवन उसे शादी की नीयत से बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने 14 नवंबर 2024 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पॉक्सो एक्ट की धारा भी जोड़ी गई पुलिस जांच और पीड़िता के बयान सहित अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले में पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के साथ बीएनएस की धारा 137(2) और 96 के तहत कार्रवाई की गई। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया। स्पेशल प्रॉसिक्यूटर ने दी जानकारी स्पेशल प्रॉसिक्यूटर विजेंद्र सिंह खत्री ने बताया कि फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेंद्र की कोर्ट ने आरोपी पवन को दोषी करार दिया। कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 वर्ष का कठोर कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा नहीं करने पर छह महीने का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। बीएनएस की धारा 137(2) के तहत तीन वर्ष का कठोर कारावास और 2 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। बीएनएस की धारा 96 के तहत पांच वर्ष का कठोर कारावास और 3 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया। जुर्माना नहीं भरने पर दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। पीड़िता को मिलेगा 40 हजार रुपये मुआवजा कोर्ट ने कुल 55 हजार रुपये के जुर्माने में से 40 हजार रुपये पीड़िता को मानसिक आघात और पीड़ा के लिए मुआवजे के रूप में देने के निर्देश दिए हैं। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी कोर्ट ने आदेश दिया कि आरोपी को सुनाई गई सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। साथ ही मुकदमे के दौरान आरोपी द्वारा न्यायिक हिरासत में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। कोर्ट ने सजा के आदेश के बाद आरोपी को जिला जेल भेजने के लिए वारंट भी जारी कर दिया।



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