सुजानपुर नगर कौंसिल अध्यक्ष चुनाव में परिणाम के 49 दिन बाद आखिरकार आम आदमी पार्टी ने जीत हासिल कर ली। कांग्रेस, भाजपा और आजाद उम्मीदवारों की गौरहाजिरी में महज 4 पार्षदों ने नीतू मन्हास को सर्वसम्मति से अपना प्रधान और सुरिंदर शर्मा को उपाध्यक्ष चुन लिया। इस पर भाजपा और कांग्रेस के साथ-साथ निर्दलीय पार्षदों ने भी एतराज जताया है। कांग्रेस विधायक नरेश पुरी और नगर कौंसिल की पूर्व प्रधान अनुराधा बाली ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रशासन पर जल्दबाजी में कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। दोनों नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाने की घोषणा की है। जबकि जालंधर में पीएम मोदी की रैली में व्यस्त होने के चलते भाजपा की इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं, निर्वाचन अधिकारी धारकलां के एसडीएम ने पूरी प्रक्रिया को वाजिब ठहराते हुए प्रधान और उपप्रधान को विजेता घोषित किया। एक वोट के कारण कांग्रेस के हाथ से फिसली प्रधानगी बता दें, चुनाव परिणाम के बाद भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के 4-4 पार्षद निर्वाचित हुए थे। जबकि, 3 निर्दलीय चुनाव जीते थे। ऐसे में तीनों पार्टियों की स्थिति बराबर थी। लेकिन, 22 जून को निर्दलीय चुनाव जीतने वाली पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष अनुराधा बाली और लक्ष्मी वर्मा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। जिससे कांग्रेस के पार्षदों की संख्या 6 हो गई। विधायक नरेश पुरी की वोट सहित संख्या 7 हो गई। प्रधान बनाने के लिए 8 पार्षदों की सहमति जरूरी थी। जादुई आंकड़े से कांग्रेस फिर भी एक वोट दूर थी। जबकि, एक आजाद पार्षद सुरिंदर वर्मा ने आम आदमी पार्टी ज्वाईन कर ली। लेकिन, शुक्रवार को प्रधान चुनाव से सुरिंदर वर्मा को भी दूर रखा गया। जिससे सुरिंदर ने भी आप से किनारा कर लिया है। चुनाव प्रक्रिया में पहुंचे आप के केवल 4 पार्षद शुक्रवार को हुई मीटिंग में सुजानपुर के वार्ड 11 से पार्षद नीतू मन्हास, वार्ड 14 से सुरिंदर शर्मा निक्का, वार्ड 12 से राणा प्रताप और वार्ड 1 सुदेश कुमारी ही चुनावी मीटिंग में पहुंचे थे। कांग्रेस, भाजपा और निर्दलीय पार्षद मिनी सचिवालय नहीं पहुंच सके। इसके चलते निर्वाचन अधिकारी शंकर शर्मा ने आम आदमी पार्टी के हलका इंचार्ज स्वर्ण सलारिया की हाजिरी में 4 पार्षदों की वोटिंग करवाई और नीतू मन्हास को प्रधान घोषित कर दिया गया। सलारिया ने कहा कि कानून के दायरे में चुनाव हुआ है।
रास्ते से वापिस लौटे कांग्रेसी पार्षद और विधायक विधायक नरेश पुरी ने कहा कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वे अपने समर्थक पार्षदों के साथ बैठक में शामिल होने के लिए आ रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि एक पार्षद के कुछ मिनट देरी से पहुंचने के कारण प्रशासन ने उनका इंतजार नहीं किया और चुनाव प्रक्रिया पूरी कर परिणाम घोषित कर दिया। विधायक के अनुसार वे चार पार्षदों के साथ सुजानपुर पहुंचने ही वाले थे कि उन्हें चुनाव परिणाम घोषित होने की सूचना मिल गई।
नरेश पुरी ने कहा कि पिछली बैठक में प्रशासन ने काफी देर तक इंतजार किया था, लेकिन इस बार कुछ ही मिनटों में पूरी प्रक्रिया पूरी कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह जनता के जनादेश का अनादर है और पूरी कार्रवाई संदिग्ध परिस्थितियों में की गई। चुनाव अनुचित, कोर्ट से मांगेंगे न्याय वहीं, नगर कौंसिल की पूर्व प्रधान अनुराधा बाली ने भी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे भी चुनाव में भाग लेने के लिए रास्ते में थीं, लेकिन प्रशासन ने महज कुछ ही मिनटों में प्रधान पद की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि पहली बैठक में कोरम पूरा न होने का हवाला देकर चुनाव स्थगित कर दिया गया था, जबकि इस बार सीमित उपस्थिति में ही चुनाव संपन्न कर दिया गया, जिसे वे पूरी तरह अनुचित मानती हैं। अनुराधा बाली ने आरोप लगाया कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत है और उनके साथ नाइंसाफी हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समर्थित पार्षदों ने अभी तक शपथ ग्रहण नहीं किया है और पूरे मामले पर कानूनी सलाह लेने के बाद अदालत में चुनौती दी जाएगी। विधायक नरेश पुरी और अनुराधा बाली ने संयुक्त रूप से कहा कि वे अपने समर्थक पार्षदों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय करेंगे तथा चुनाव प्रक्रिया को न्यायालय में चुनौती देंगे। उनका कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और उन्हें उम्मीद है कि सुजानपुर की जनता को न्याय मिलेगा। 24 घंटे पहले दिया था एजेंडा निर्वाचन अधिकारी शंकर शर्मा ने कहा कि 24 घंटे पहले चुनाव संबंधी एजेंडा सभी पार्षदों को दिया गया था। 11 बजे का समय तय किया गया था। लेकिन, कांग्रेस और भाजपा के पार्षद नहीं पहुंचे। फिर कानून के मुताबिक उपस्थित पार्षदों की उपस्थिती में ही चुनाव करवाना पड़ा। जिसमें नीतू मन्हास को प्रधान और सुरिंदर शर्मा निक्का को उप-प्रधान बनाया गया है।
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