शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) के अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह लोक मिलनी कार्यक्रम के तहत संगरूर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पंजाब से जुड़े विभिन्न गंभीर मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। पंजाब के मौजूदा हालातों पर बात करते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कहा कि राज्य में कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे व्यापारिक वर्ग में भारी निराशा का माहौल है। उन्होंने गैंगस्टरों की सक्रियता, चोरी, लूटपाट और जबरन वसूली की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दावा किया कि इन मामलों की जांच अमेरिकी एजेंसी एफबीआई भी कर रही है, और इस पूरे घटनाक्रम में पंजाब पुलिस की संलिप्तता सामने आना एक बेहद गंभीर चिंता का विषय है। एसआईटी जांच और स्थानीय रोजगार का मुद्दा सुखबीर बादल को एसआईटी द्वारा समन किए जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इस मामले में केवल खानापूर्ति कर रही है और धरातल पर कुछ खास नहीं किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने रोजगार के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि पंजाब के युवाओं को नौकरी देने के नाम पर बाहरी राज्यों के युवाओं को प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके कारण पंजाब के स्थानीय योग्यता धारक युवा बेरोजगार हो रहे हैं। विशेष वित्तीय पैकेज और बिजली विभाग की स्थिति ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की कि पंजाब को भी अन्य राज्यों की तरह कानूनी छूट दी जानी चाहिए और इस समय सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब को एक विशेष वित्तीय पैकेज की सख्त आवश्यकता है। उन्होंने राज्य की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि पंजाब सरकार का खजाना पूरी तरह खाली है और बिजली विभाग के हालात इतने खराब हैं कि कर्मचारियों के पास काम के लिए तार खींचने तक का बजट उपलब्ध नहीं है। पंथक पार्टियों और जनता से एकजुटता की अपील राज्य के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने पंजाब के लोगों, पंथक पार्टियों और आम जनता से एक मंच पर आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हम सभी पंजाबी हैं, पंजाब में रहते हैं और हमें यहीं रहना है, इसलिए राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर सभी को एकजुट होकर राज्य के हितों की रक्षा के लिए काम करना चाहिए। फिल्म सतलुज पर प्रतिबंध का विरोध सेंसरशिप के मुद्दे पर बोलते हुए ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने फिल्म ‘सतलुज’ पर लगाए गए प्रतिबंध को गलत ठहराया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक देश में सभी को अपनी बात कहने और अभिव्यक्ति का पूरा अधिकार है। उन्होंने ‘कश्मीर फाइल्स’ और ‘केरल स्टोरी’ जैसी फिल्मों का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि जब उन फिल्मों को हरी झंडी मिल सकती है, तो ‘सतलुज’ को क्यों रोका गया? उन्होंने कहा कि यदि फिल्म को समय पर रिलीज होने दिया जाता, तो मौजूदा विवादित स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।
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संगरूर में लोक मिलनी कार्यक्रम में पहुंचे ज्ञानी हरप्रीत सिंह:कानून व्यवस्था, बेरोजगारी पर उठाए सवाल; पंजाब के लिए विशेष पैकेज मांगा
