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वेंडर्स से वसूली:निगम सुपरिंटेंडेंट, 9 इंस्पेक्टरों पर विजिलेंस ने दर्ज किया करप्शन का केस



​चंडीगढ़ नगर निगम के इंफोर्समेंट विंग में रेहड़ी-फड़ी वालों (वेंडर्स) और दुकानदारों से सालाना करोड़ों रुपए की अवैध वसूली में पर्दाफाश हुआ है। विजिलेंस पुलिस स्टेशन, चंडीगढ़ ने शुक्रवार को एफआईआर दर्ज की है। ​ इस हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार रैकेट में निगम के इंफोर्समेंट विंग के सुपरिंटेंडेंट सुनील दत्त सहित 9 इंस्पेक्टर्स के नाम हैं। इनमें वेदप्रकाश शर्मा, राजेश कुमार उर्फ गब्बर, निर्मल सिंह, रत्तन सिंह, रजत शर्मा, अरूण कुमार, रवि, साहिल भोला और दीपक शामिल है। बेलदार शिकायतकर्ता विकास, राजिंदर, चंदरशेखर, सुरजीत, मंदीप मनी, महेंद्र, नवीन, दर्शन और मलकीत के नाम भी शामिल हैं।बेलदार विकास का आरोप था कि सभी बेलदार उक्त इंस्पेक्टरों को उनके एरिया से लाखों की मंथली इकट्ठी कर देते थे। प्रशासन ने परमिशन के बाद विजिलेंस ने सालाना करीब 60 करोड़ के कलेक्शन मामले में आरोपियों को नामजद कर गिरफ्तारी की तैयारी कर ली है। सेक्टर-25 निवासी बेलदार विकास की पिछले साल आई शिकायत के बाद विजिलेंस लगातार जांच कर रही थी। विकास के आरोप सही पाए गए और शुक्रवार को इंस्पेक्टर रोहित कुमार की शिकायत पर सभी के खिलाफ केस दर्ज किया गया। न कोई सिफारिश और न कोर्ट में मुकरने का खतरा सीनियर अधिकारियों के अनुसार नगर निगम के उक्त आरोपी पहले भी मामले को दबाने के लिए शिकायतकर्ता विकास की वीडियो बना वायरल करवा चुके हैं। उसे पैसों तक की ऑफर दी गई। यही कारण है कि विजिलेंस ने उक्त सब पर अपने ही पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर रोहित कुमार को एफआईआर में शिकायतकर्ता बनाया है। अब न कोई सिफारिश चलेगी और न कोर्ट में किसी गवाह के मुकरने का कोई मामला का खतरा रहेगा। विजिलेंस की हिस्ट्री में यह पहला मामला है, जब एक साथ निगम के सुपिंरटेंडेंट सहित इंस्पेक्टरों को नामजद किया गया है। प्रशासन ने परमिशन के बाद विजिलेंस ने सालाना करीब 60 करोड़ के कलेक्शन मामले में आरोपियों को नामजद कर गिरफ्तारी की तैयारी कर ली है। सेक्टर-25 निवासी बेलदार विकास की पिछले साल आई शिकायत के बाद विजिलेंस लगातार जांच कर रही थी। विकास के आरोप सही पाए गए और शुक्रवार को इंस्पेक्टर रोहित कुमार की शिकायत पर सभी के खिलाफ केस दर्ज किया गया। ​घोटाले का खुलासा निगम के इंफोर्समेंट विंग में पिछले 18 सालों से कार्यरत बेलदार विकास कुमार (निवासी सेक्टर-25 डी, चंडीगढ़) की शिकायत और एक सोशल मीडिया वीडियो से हुआ। विकास कुमार पिछले 3 वर्षों से इंस्पेक्टर रजत शर्मा के साथ तैनात था। शिकायत के अनुसार, इंस्पेक्टर द्वारा उस पर रेहड़ी-फड़ी वालों और दुकानदारों से जबरन पैसे वसूलने का भारी दबाव बनाया जा रहा था। मना करने या टारगेट पूरा न करने पर नौकरी से निकालने की धमकियां दी जा रही थीं। विकास ने नोटों के बंडल के साथ 12 अगस्त 2025 वीडियो बनाकर रिश्वत लेने और निगम के इंफोर्समेंट डिपार्टमेंट में चल रहे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। वीडियो आने के बाद आरोपियों ने उस पर दबाव बनाया और अगली सुबह तड़के विकास की एक ओर वीडियो वायरल हुई। बताया गया कि पिछली रात उसने शराब के नशे में गलत शब्द यूज कर वीडियो बनाया था। आरोप है कि इंफोर्समेंट विंग के अधिकारियों ने सेक्टर-17 स्थित निगम कार्यालय में इसके लिए विकास पर दबाव बनाया। } सुपरिंटेंडेंट: सुनील दत्त (इंफोर्समेंट विंग एमसी ) } इंस्पेक्टर: वेद प्रकाश शर्मा, राजेश कुमार उर्फ गब्बर, निर्मल सिंह, रतन सिंह, रजत शर्मा, अरुण कुमार, रवि, साहिल भोला, दीपक। } वसूली करने वाले बेलदार: विकास, राजेंद्र, सुभाष, चंदर शेखर, सुरजीत, मनदीप मणी, महेंद्र, नवीन, दर्शन, मलकीत। ​एफआईआर में दर्ज प्रमुख नाम ​शिकायतकर्ता विकास कुमार द्वारा विजिलेंस को दी गई लिखित शिकायत में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। चंडीगढ़ के वैध-अवैध वेंडर्स और दुकानदारों से हर साल लगभग 50 से 60 करोड़ रुपये वसूले जाते हैं। उसने इस पूरे नेटवर्क के बारे में बताया। सारा पैसा एरिया इंस्पेक्टरों और सुपरिंटेंडेंट में बंटता था। हैरानी की बात है कि मामला उजागर होने के बाद भी सभी आरोपी 9 इंस्पेक्टरों को तो तुरंत प्रभाव से इस पोस्ट से हटाकर ऑफिस वर्क में शिफ्ट कर दिया, लेकिन सुपरिंटेंडेंट सुनील दत्त को आज तक उसी पोस्ट पर रखा हुआ है। निगम कर्मचारियों में इस बात की चर्चा थी कि अपने चहेते सुपरिंटेंडेंट को निगम अधिकारी ने क्यों नहीं बदला‌? इसको लेकर भी विजिलेंस को जांच हो। वहीं विजिलेंस के एक सीनियर अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह करोड़ों के सालाना कलेक्शन का खेल मात्र सुपरिंटेंडेंट व इंस्पेक्टरों में नहीं बंटता था। इसका हिस्सा कई सीनियर अफसरों तक भी जाता था, जिनके बारे में विजिलेंस के पास सबूत आ चुके हैं। उन्हेंभी बहुत जल्द इस मामले में नामजद कर अरेस्ट किया जाएगा।



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