रेवाड़ी के नया गांव दौलतपुर में अंबेडकर भवन(कम्युनिटी सेंटर) के लिए प्रस्तावित जमीन विवादों में घिरती दिख रही है। वार्ड-13 की पार्षद संतोष जांगिड़ ने भवन निर्माण के लिए दी जाने वाली जमीन के दस्तावेजों में छेड़छाड़ के आरोप लगाते हुए एसपी को शिकायत दी। जिसमें बताया कि आवेदनकर्ता ने खसरा नंबर 295 के साथ 244/1 जोड़कर मेरे हस्ताक्षर का दुरुपयोग किया है। आवेदनकर्ता ने कहा कि इन्होंने खुद गैरमुमकिन जोहड़ की जमीन 295 लिखवाई थी। मैंने उसी समय हस्ताक्षर होने के बाद उसके साथ नगर परिषद की मलकियत वाली ख्सरा नंबर 244/1 जमीन का जोड़ दिया था। ताकि अंबेडकर भवन निर्माण में किसी प्रकार की बाधा न आए। गांव की पार्टी-बाजी के चलते मुझे बदनाम करने के लिए ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं। घटना का एक सीसीटीवी भी सामने आया है। जिसमें आवेदक दारा सिंह और पार्षद पति दीपक एक दूसरे के साथ घर के बाहर गली में दिखाई दे रहे हैं। हस्ताक्षर के बाद छेड़छाड़ गलत वार्ड-13 की पार्षद संतोष दीपक जांगिड़ ने 24 जुलाई को एसपी को शिकायत दी। जिसमें बताया कि 16 जुलाई को मेरे गांव के दारा सिंह एक दस्तावेज लेकर साइन करवाने के लिए मेरे पास आए। जिसमें खसरा नंबर 295 की जमीन अंबेडकर भवन बनाने के लिए देने की बात लिखी हुई थी। जिस पर साइन करने के बाद मैने उसका फोटो ले लिया।
डीसी को वह दरखास्त देने से पहले दारा सिंह ने उसमें खसरा नंबर 295 के साथ 244/1 भी जोड़ दिया। जो न केवल धोखाधड़ी और आपराधिक कृत्य है, बल्कि जनप्रतिनिधि के साथ विश्वासघात भी है। उन्होंने आरोपी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में कोई दूसरा ऐसा करने की हिम्मत न जुटा पाए। सहमति से लिखा खसरा नंबर आवेदक दारा सिंह ने कहा कि खसरा नंबर 244 तालाब की गैरमुमकिन जमीन है। यह जानते हुए संतोष और दीपक ने जानबूझकर अंबेडकर भवन के लिए उस जमीन की एप्लीकेशन लिखवाई। हस्ताक्षर के बाद जब मैने कानूनी बाधा के बारे में बताया तो दीपक की सहमति से ही खसरा नंबर 244/1 जोड़ा था। जिससे अंबेडकर भवन के निर्माण में कोई बाधा न आए। प्रशासन ने खसरा नंबर 244/1 से 9 लोगों के अवैध कब्जे हटाए थे। जिनमें से एक महिला पार्षद के चाचा ससुर राधेश्याम जांगिड़ भी थे। साजिश रचकर दी शिकायत नगर परिषद हाउस की बैठक में प्रस्ताव पास किया था। जिसमें खसरा नंबर 295 के साथ 244/1 शामिल हैं। मैंने सदर थाना में भी अपने बयान दर्ज करवा दिए हैं। जिसमें दीपक की सहमति से खसरा नंबर 244/1 की जमीन जोड़ने की स्वीकारी है। गांव की आपसी गुटबाजी में मुझे बदनाम करने के लिए एक सोची समझी रणनीति के तहत पहले गैरमुमकिन जमीन लिखवाई और हस्ताक्षर के बाद उसका फोटो लिया।
नगर परिषद की मलकियत वाली जमीन लिखने की सहमति देकर मेरे खिलाफ पुलिस को शिकायत दी। ताकि सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने वाली मुहिम को रोका जा सके। पार्षद पति के नजदीकियों का तालाब की 3 कनाल 15 मरले जमीन पर कब्जा है। जहां खेती की जा रही है। इन्हीं के साथियों ने गांव में प्रस्तावित कम्युनिटी सेंटर के निर्माण और सरकारी जमीन की तारबंदी करने को भी कोर्ट में चुनौती दी हुई है। मेरे कोइ रोल नहीं- सभी आरोप झूठे पार्षद पति दीपक जांगिड़ ने कहा कि हमारी आपत्ति केवल हस्ताक्षर के बाद दस्तावेज में छेड़छाड़ पर है। अंबेडकर भवन जहां भी बने, हम उसका स्वागत करेंगे। अपने गांव और वार्ड में रहने वाले सभी लोग मेरे जानकार और परिचित हैं। किसी भी प्रकार का गलत काम करने वालों का हम कभी साथ नहीं देंगे। मुझे पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से निराधार हैं।
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