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यूटयूबर जसबीर दस महीने बाद से जेल से आया बाहर:पाकिस्तान के लिए जासूसी का था आरोप, हाईकोर्ट से मिली जमानत; भाई का रहूंगा कर्जदार




पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में अरेस्ट यूट्यूबर जसबीर सिंह उर्फ जॉन माहल को बड़ी राहत मिली है। करीब 10 महीने बाद उन्हें जमानत मिल गई। जेल से बाहर आने के बाद वह अपने घर पहुंचे, जहां उन्होंने घर की दहलीज को नमन कर अंदर प्रवेश किया। वहीं, उन्होंने अपना पहला वीडियो भी अपलोड कर दिया। उन्होंने बताया कि जेल से बाहर आने के बाद बड़े लोगों के फोन आए। वह भी उन्हें अपने परिवार जैसा मानते हैं। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी कि जसबीर किसी पाकिस्तानी नागरिक या खुफिया अधिकारी के संपर्क में था। जिन वीडियो को जासूसी का सबूत बताया गया था, वे सार्वजनिक स्थानों के थे, जहां आम जनता जा सकती है। साथ ही पुलिस उनके मोबाइल से किसी भी तरह की चैट या गोपनीय जानकारी साझा करने का कोई स्वतंत्र और ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। इसी आधार पर उन्हें जमानत मिल गई। घर पहुंचने पर शेयर किए पहले वीडियो में उठाईं दो बातें जेल में पता लगा परिवार कितना प्यार करता है
जॉन माहल ने अपने खेतों से एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने जेल के दिनों को याद करते हुए भावुक बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि जब भी वह जेल का समय याद करते हैं, उनकी आंखें भर आती हैं। माहल ने बताया कि जब परिवार उनसे मिलने जेल आता था, तो बीच में जाली लगी होती थी। एक तरफ वह होते थे और दूसरी तरफ उनका परिवार। उन्हें देखकर परिवार रोने लगता था, वहीं उनके भाई भी भावुक हो जाते थे। उस समय उन्हें एहसास हुआ कि परिवार उनसे कितना प्यार करता है। उन्होंने कहा कि बाद में वह घरवालों से कहने लगे थे कि मिलने न आया करें। भाई का कर्ज कभी नहीं चुका पाऊंगा
माहल ने अपने भाई का जिक्र करते हुए कहा कि मुश्किल समय में उसने उनका बहुत साथ दिया। तीन-चार महीने तक वह लगातार कोर्ट में बैठा रहा। पुरानी यादें साझा करते हुए माहल ने बताया कि जब वह बाहर थे, तब उन्होंने करियर में आगे बढ़ने के लिए काफी पैसा लगाया था। इसी दौरान उनके पिता का एक्सीडेंट हो गया और वह कोमा में चले गए। वहीं उनकी मां को ट्यूमर हो गया। तीन-चार महीनों के भीतर दोनों का निधन हो गया। माहल ने कहा कि उस मुश्किल दौर में उनके भाई ने माता-पिता की जिस तरह सेवा की, उसका एहसान वह जिंदगीभर नहीं चुका सकते। पंजाब police के स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (SSOC) ने उन्हें 4 जून 2025 को मोहाली से गिरफ्तार किया था। उन पर जासूसी और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए काम करने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस के अनुसार, वह भारतीय सेना की गतिविधियों और भाखड़ा डैम व मोहाली एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील स्थानों से जुड़ी जानकारी पाकिस्तानी हैंडलर्स तक पहुंचा रहे थे। वह करीब 10 महीने से अधिक समय तक न्यायिक हिरासत में रहे।



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