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यमुनानगर का सभरवाल टायर्स फायरिंग केस:शूटरों से आगे बढ़ी जांच, अब वारदात का मास्टरमाइंड पुलिस के निशाने पर, निर्देश देने वाले हैंडलर की तलाश तेज




यमुनानगर की रामपुरा कॉलोनी स्थित सभरवाल टायर्स शोरूम पर हुई फायरिंग और रंगदारी प्रकरण में पुलिस की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। बिहार और राजस्थान से गिरफ्तार किए गए दोनों शूटरों से पूछताछ के बाद जांच एजेंसियों का पूरा फोकस उस व्यक्ति की पहचान पर है, जिसने उन्हें इस वारदात को अंजाम देने का निर्देश दिया था। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि दोनों आरोपी खालिस्तानी आतंकी कुलबीर सिंह उर्फ सिद्धू के सीधे संपर्क में थे। ऐसे में पुलिस अब उस मध्यस्थ की भूमिका खंगाल रही है, जिसके जरिए पूरी साजिश को अंजाम तक पहुंचाया गया। बिहार-राजस्थान के शूटरों से चल रही पूछताछ सीआईए-2 की जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों को वारदात के लिए सीधे नहीं, बल्कि किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से निर्देश मिले थे। जांच अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि यह हैंडलर किस नेटवर्क से जुड़ा है, उसका संचालन कहां से हो रहा था और क्या उसके तार किसी संगठित अपराध या आतंकी मॉड्यूल से जुड़े हैं। पुलिस का मानना है कि इस कड़ी तक पहुंचना पूरे मामले की सबसे अहम चुनौती है। अब तक की कार्रवाई में पुलिस ने बिहार के मधुबनी जिले के ठाकुर किशनपुर निवासी राजेश कुमार और राजस्थान के खैरथल-कोटपूतली जिले के खालवाड़ निवासी सरजीत को गिरफ्तार किया है। दोनों से लगातार पूछताछ की जा रही है। उनके मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट कॉलिंग, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य डिजिटल डाटा को खंगाला जा रहा है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि वारदात से पहले और बाद में दोनों किन-किन लोगों के संपर्क में थे। फायरिंग कर आतंकी सिद्धू के पोस्टर लगाए थे गौरतलब है कि 11 जुलाई की देर रात रामपुरा कॉलोनी स्थित सभरवाल टायर्स शोरूम पर बाइक सवार बदमाशों ने ताबड़तोड़ छह राउंड फायरिंग की थी। वारदात के बाद मौके पर कुलबीर सिद्धू के नाम से धमकी भरा पर्चा छोड़ दिया गया था। वहीं कारोबारी ईशान सभरवाल के व्हाट्सएप पर विदेशी नंबर से पहले कॉल और बाद में दो वॉइस मैसेज भेजकर रंगदारी भी मांगी गई थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु आरोपियों तक निर्देश पहुंचाने वाले व्यक्ति की पहचान करना है। तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल ट्रेल, पूछताछ और दूसरे राज्यों से जुटाई जा रही सूचनाओं को जोड़कर पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वारदात के पीछे किस स्तर का संगठित गिरोह सक्रिय था।



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