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हिमाचल हाईकोर्ट ने माजरीहट्टा से नालागढ़ चौक तक प्रस्तावित करीब 31.195 किलोमीटर लंबे फोरलेन सड़क निर्माण कार्य की धीमी रफ्तार पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने निर्माण कार्य में आ रही बाधाओं को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी समेत कई अधिकारियों और संस्थाओं को मामले में प्रतिवादी बनाने के आदेश दिए हैं। चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस बिपिन चंद्र नेगी की बैंच ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किए। नेशनल हाइवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि इस फोरलेन परियोजना का करीब 13 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा क्षेत्र में आता है। कोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में पंचकूला के सक्षम प्राधिकारी की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के कारण हरियाणा के मुख्य सचिव को पक्षकार बनाया जा रहा है। अदालत ने फोरलेन निर्माण की निगरानी और कार्य में आ रही मूलभूत अड़चनों को दूर करने की जरूरत पर भी चिंता जताई। सड़क के आरक्षित क्षेत्र में लोगों ने अवैध दीवारें बनाई सुनवाई के दौरान सामने आया कि सड़क के लिए आरक्षित राइट ऑफ वे (ROW) क्षेत्र में कुछ स्थानीय लोगों ने अवैध रूप से दीवारें खड़ी कर दी हैं। इसके अलावा कुछ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की ओर से राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र में अवैध रूप से पानी की निकासी किए जाने का मामला भी सामने आया। चीफ सेक्रेटरी के अलावा इन अधिकारियों को भी नोटिस हाईकोर्ट ने परियोजना की प्रगति में तेजी लाने और बाधाओं को हटाने के लिए हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव के अलावा उपायुक्त पंचकूला, बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ विकास प्राधिकरण (BBNDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और हिमाचल प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी प्रतिवादी बनाने के आदेश दिए हैं।
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माजरीहट्टा-नालागढ़ फोरलेन निर्माण में देरी पर हाईकोर्ट सख्त:हरियाणा के चीफ सेक्रेटरी को भेजा नोटिस, नए पक्षकार जोड़े, 17 अगस्त को होगी अगली सुनवाई







