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मनरेगा कर्मचारियों का मानसा में प्रदर्शन:वेतन व नौकरी से हटाने के विरोध में; पंजाब सरकार ने केंद्र पर आरोप लगाए




मनरेगा (MGNREGA) के तहत कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों, वेतन न मिलने और हाल ही में नौकरी से हटाए जाने के विरोध में मानसा में पंजाब सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कर्मचारियों में सरकार के रवैये को लेकर भारी रोष है। अपनी आवाज बुलंद करने के लिए मनरेगा के तहत काम करने वाले जीआरएस (GRS), कंप्यूटर ऑपरेटरों और अन्य स्टाफ ने जिला परिषद कार्यालय से लेकर बस स्टैंड चौक तक एक विशाल रोष मार्च निकाला। एक तरफ जहां पंजाब सरकार इसे केंद्र का मामला बता रही है, वहीं रोजगार छिनने से नाराज कर्मचारी राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह विवाद और बढ़ने के आसार हैं। 18 साल की सेवा के बाद रोजगार छीनने का आरोप जीआरएस यूनियन के जिला प्रधान किशोर सिंह, जसपाल सिंह जस्सी, नतेश गुप्ता, इकबाल सिंह और प्रीतपाल सिंह ने कर्मचारियों का पक्ष रखते हुए कहा कि वे पिछले 18 वर्षों से मनरेगा के तहत पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बेहद कम वेतन दिया जा रहा है। कर्मचारी नेताओं ने आरोप लगाया कि अपनी मांगों को लेकर हाल ही में उन्होंने पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध के आवास के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। जायज मांगें मानने के बजाय सरकार ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए उन्हें नौकरी से ही बर्खास्त कर दिया, जिससे उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उन्हें तुरंत बहाल नहीं किया गया और मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। पंचायत मंत्री का पलटवार: केंद्र सरकार ने रोका है वेतन दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर पंजाब के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंध ने पंजाब सरकार का बचाव करते हुए ठीकरा केंद्र सरकार पर फोड़ दिया है। मंत्री सोंध ने स्पष्ट किया कि इन सभी मनरेगा कर्मचारियों की नियुक्ति केंद्र सरकार की योजना के अधीन हुई थी और इनका वेतन भी केंद्र सरकार द्वारा ही रोका गया है। पंजाब सरकार पूरी तरह से इन कर्मचारियों के साथ खड़ी है। इस गंभीर मसले को लेकर केंद्रीय पंचायत मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पंजाब सरकार की तरफ से एक आधिकारिक मांग पत्र भी भेजा जा चुका है। मानवाधिकारों और रोजगार को ध्यान में रखते हुए पंजाब सरकार मनरेगा कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।



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