पंजाब में टारगेट किलिंग और टेरर फंडिंग के आरोप में पिछले आठ साल से जेल में बंद जगतार सिंह जोहल के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र (UN) के विशेषज्ञ सामने आए हैं। उन्होंने इस मामले को लेकर भारत को एक पत्र भी लिखा है। विशेषज्ञों ने उनकी गिरफ्तारी को मनमानी बताया है और कहा है कि उन्हें इतने लंबे समय तक हिरासत में रखना सही नहीं है। उनके अनुसार, यह स्थिति उनके लिए मानसिक यातना जैसी बन गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में न्याय ठीक तरीके से नहीं हुआ है और उन्हें हिरासत में रखने की कोई ठोस वजह नजर नहीं आती। ये सभी विशेषज्ञ अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हैं। संयुक्त राष्ट्र के इन 10 विशेषज्ञों ने कहा है कि वे इस मामले में आगे की स्थिति पर नजर रखेंगे। इनमें यातना, धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता, अल्पसंख्यकों के अधिकार, आतंकवाद से निपटते समय मूल अधिकारों की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की आज़ादी और मानवाधिकार रक्षकों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं। इसके अलावा, इनमें से चार सदस्य मनमानी हिरासत पर काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र के वर्किंग ग्रुप से हैं। भाई ने दिसंबर में विदेश सचिव से मुलाकात की
जोहल के भाई गुरप्रीत सिंह जोहल ने दिसंबर में फॉरेन सेक्रेटरी यवेट कूपर से मुलाकात की थी। उन्होंने इस हफ्ते यूके सरकार से अपने भाई की रिहाई के लिए कार्रवाई करने की अपील दोहराई। उन्होंने कहा, “यह UN की तरफ से अब तक का सबसे मजबूत हस्तक्षेप है। कानूनी विशेषज्ञों के लिए यह साफ है कि मेरे भाई को जेल में नहीं होना चाहिए और बिना किसी ठोस सबूत के उसे आठ साल तक बंद रखना बड़ी नाइंसाफी है। उन्होंने यह भी कहा कि फॉरेन सेक्रेटरी भारत के ‘स्वतंत्र न्यायिक प्रणाली’ का सम्मान करने की बात करते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि उनका भाई लगातार चलने वाली सुनवाईयों में फंसा हुआ है, जहां उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया और कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।”
पहले भी उठ चुका है मुद्दा
परिवार के एक सदस्य ने कहा कि पिछली बार जब संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने जगतार की रिहाई की मांग की थी, तब कीर स्टारमर ने इसका समर्थन किया था और उस समय के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को पत्र भी लिखा था। अब जब वह खुद प्रधानमंत्री हैं, तो सवाल है कि क्या वह उनके भाई को घर वापस लाने के लिए पूरी कोशिश करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जब जगतार को पहले मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था, तब उन्होंने यूके सरकार को उनकी रिहाई के लिए एक स्पष्ट योजना दी थी। लेकिन एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और केवल पुराने बहाने ही सुनने को मिल रहे हैं।
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ब्रिटिश नागरिक जग्गी जोहल के हक में UN विशेषज्ञ:भारत सरकार को लिखा पत्र, टारगेट किलिंग केस में 8 साल से जेल में
