नगर निगम के कई अधिकारियों के सरकारी मोबाइल नंबर पिछले करीब दो हफ्तों से ‘आउट ऑफ रीच’ हैं। वजह है- कॉर्पोरेट मोबाइल कनेक्शन का पूरा बिल जमा न होना। निगम ने कई अधिकारियों के लिए करीब 80-85 सरकारी मोबाइल नंबर लिए हुए हैं। इनका बिल करीब 11 हजार रुपए महीना आता है। निगम ने पूरा बिल जमा नहीं किया है, जिससे नंबर बंद पड़े हैं। हालात ये हैं कि वॉट्सएप कॉल के लिए भी अफसरों को किसी दूसरे से हॉटस्पॉट लेना पड़ रहा है। ये नंबर जेई, एसडीई, एक्सईएन, एनफोर्समेंट अफसरों और सैनिटरी इंस्पेक्टरों को सरकारी काम के लिए दिए गए हैं। समस्या उन तीन-चार कर्मचारियों के कारण पैदा हुई जो रिटायर हो चुके हैं। उनके नाम पर जारी मोबाइल नंबर अब तक सरेंडर नहीं हुए और उनका बिल भी जमा नहीं हुआ। नियमों के कारण नगर निगम यह बकाया नहीं भर सकता। कॉर्पोरेट अकाउंट में बिल पेंडिंग होने से पूरे कनेक्शन के नंबर बंद हो गए। नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी के साथ मामला उठाया गया है। जल्द ही सभी नंबर चालू कराने की कोशिश की जा रही है। एक हफ्ते वेबसाइट भी रही थी बंद यह पहली बार नहीं है जब नगर निगम की व्यवस्था सवालों में आई है। पिछले पूरे हफ्ते निगम की वेबसाइट बंद रही थी। वेबसाइट बंद होने का मुद्दा कमिश्नर अमित कुमार की बैठक में भी उठा था, जिसके बाद इसे दोबारा शुरू कराया गया। अब सरकारी मोबाइल नंबर बंद होने से निगम की कार्यप्रणाली पर फिर सवाल उठ रहे हैं।
Source link
बिल पेंडिंग: निगम के सरकारी नंबर बंद दो हफ्ते से अफसर ‘आउट ऑफ रीच’
