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बिजली प्राइवेटाइजेशन के विरोध में आए ऊर्जा मंत्री विज:विभाग ने भी जताया विरोध; इसकी 4 बड़ी वजहें, गुरुग्राम-नूंह फर्स्ट फेज, सेकेंड में 2 और जिले




हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह की बिजली वितरण व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपने के प्रस्ताव पर विरोध तेज हो गया है। खास बात यह है कि इस बार विरोध सिर्फ कर्मचारी संगठनों तक सीमित नहीं है। ऊर्जा मंत्री अनिल विज भी सार्वजनिक रूप से इस प्रस्ताव पर आपत्ति जता चुके हैं। दूसरी ओर, दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) ने भी हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) की जनसुनवाई में निजीकरण के खिलाफ अपना पक्ष रखा।
सूत्रों के मुताबिक सरकार फिलहाल गुरुग्राम और नूंह को पहले चरण में निजी कंपनी को सौंपने की तैयारी में है। यदि यह मॉडल लागू होता है तो दूसरे चरण में पंचकूला और फरीदाबाद को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। हालांकि सरकार की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

बिजली विभाग के विरोध की ये 4 वजहें… 1. कर्मचारियों का भविष्य अधर में

विभाग का सबसे बड़ा सवाल यही है कि गुरुग्राम और नूंह में कार्यरत नियमित और अनुबंधित कर्मचारियों का क्या होगा। निजीकरण के बाद उनके समायोजन और सेवा सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई है।

2. DHBVN की आर्थिक रीढ़ हैं गुरुग्राम-नूंह

गुरुग्राम और नूंह दक्षिण हरियाणा बिजली निगम के सबसे अधिक राजस्व देने वाले क्षेत्र हैं। इन दोनों जिलों से ही विभाग को अकेले 777 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिल रहा है। विभाग का तर्क है कि यदि सबसे कमाऊ जिले अलग हो गए तो निगम की वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है और अन्य जिलों में बिजली व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

3. पूरे प्रदेश में मॉडल लागू होने की आशंका

सूत्रों के अनुसार यह केवल शुरुआत है। गुरुग्राम और नूंह में पहले चरण के बाद पंचकूला और फरीदाबाद में भी बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण की तैयारी हो सकती है। कर्मचारी संगठन इसे पूरे हरियाणा में निजीकरण की शुरुआत मान रहे हैं। 4. उपभोक्ताओं पर असर का सवाल
विभाग ने HERC के सामने तर्क दिया कि निजीकरण का उद्देश्य केवल राजस्व नहीं होना चाहिए। उपभोक्ताओं को मिलने वाली सेवाओं, शिकायत निवारण और बिजली दरों पर संभावित प्रभाव का भी व्यापक मूल्यांकन जरूरी है।

विज ने क्यों जताई आपत्ति?

अनिल विज ने कहा है कि बिजली जैसी आवश्यक सेवा में जल्दबाजी ठीक नहीं। कर्मचारियों और उपभोक्ताओं के हित सर्वोपरि होने चाहिए। किसी भी फैसले से पहले सभी पक्षों की राय जरूरी।सरकार को सभी पहलुओं पर विचार करना चाहिए। HERC ने अब तक क्या किया… हरियाणा में गुरुग्राम और नूंह की बिजली वितरण व्यवस्था निजी कंपनी को सौंपने के प्रस्ताव पर फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने मामले की गहन जांच के लिए तीन सदस्यीय स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की है। समिति 13 जुलाई से काम शुरू करेगी और 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी। इसके बाद आयोग अंतिम निर्णय लेगा।
आयोग ने यह अंतरिम आदेश गुरुवार को जारी किया। इससे पहले 8 जुलाई को हुई जनसुनवाई में निजी कंपनी, बिजली निगमों, कर्मचारी संगठनों, किसान संगठनों, उपभोक्ता प्रतिनिधियों और अन्य पक्षों की दलीलें सुनी गई थीं। सुनवाई पूरी होने के बाद आयोग ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।

3 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी करेगी जांच

समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त IAS अधिकारी आलोक निगम होंगे। उनके साथ बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञ ई. रविंदर कुमार शर्मा और वित्त विशेषज्ञ बिभू प्रसाद महापात्र सदस्य होंगे। आयोग ने कहा कि बिजली क्षेत्र पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभाव, उपभोक्ताओं के हित, वित्तीय, तकनीकी और कानूनी पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा जरूरी है, इसलिए विशेषज्ञ समिति बनाई गई है।

इन बिंदुओं पर होगी जांच

समिति यह जांच करेगी कि एलवन पावर प्राइवेट लिमिटेड बिजली अधिनियम और HERC के सभी नियमों के तहत समानांतर वितरण लाइसेंस पाने की पात्रता रखती है या नहीं। साथ ही कंपनी की वित्तीय क्षमता, तकनीकी तैयारी, निवेश योजना, उपभोक्ता हित, टैरिफ पर असर, क्रॉस-सब्सिडी, बिजली आपूर्ति व्यवस्था और सार्वजनिक हित जैसे पहलुओं का भी मूल्यांकन किया जाएगा।

30 लाख रुपए जमा कराने का आदेश

आयोग ने याचिकाकर्ता कंपनी को विशेषज्ञ समिति के खर्च के लिए 30 लाख रुपए अग्रिम जमा कराने के निर्देश दिए हैं। समिति का खर्च पहले आयोग वहन करेगा, जिसकी बाद में भरपाई कंपनी से की जाएगी। इसके अलावा कंपनी और दोनों बिजली निगमों को एक-एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के भी आदेश दिए गए हैं।

जानिए…पूरा मामला

एलवन पावर प्राइवेट लिमिटेड ने बिजली अधिनियम-2003 के तहत गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने की मांग की है। इस प्रस्ताव का बिजली कर्मचारी संगठनों, किसान संगठनों और कई अन्य पक्षों ने विरोध किया है, जबकि उद्योगों, आरडब्ल्यूए और कई उपभोक्ता संगठनों ने इसका समर्थन किया है। आयोग अब विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद अंतिम फैसला करेगा।

इनेलो बोलीं- बिजली का निजीकरण स्वीकार नहीं

जनसुनवाई के दौरान पूर्व वित्त मंत्री एवं इनेलो नेता संपत सिंह ने आयोग के सामने प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा कि सरकार निजी कंपनियों को बिजली क्षेत्र में लाकर सार्वजनिक व्यवस्था को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि किसी भी कीमत पर बिजली का निजीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सार्वजनिक व्यवस्था पर होगा असर

इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (EEFI) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा और सुरेश राठी ने कहा कि गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर लाइसेंस देना सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को कमजोर करने की सुनियोजित कोशिश है। उन्होंने कहा कि इस कदम का हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।
जनसुनवाई में इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया, ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन, हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, एचएसईबी वर्कर्स यूनियन, संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े संगठनों और अन्य सामाजिक संगठनों ने भी अपना विरोध दर्ज कराया।

इंजीनियर उठा चुके सवाल

हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन ने आयोग से आवेदन खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि आवेदनकर्ता कंपनी का गठन केवल एक साल पहले हुआ है और उसकी चुकता पूंजी सिर्फ 1 करोड़ रुपए है, जबकि गुरुग्राम और नूंह से हर महीने करीब 777 करोड़ रुपए का बिजली राजस्व प्राप्त होता है।
एसोसिएशन ने कहा कि बिजली वितरण जैसी महत्वपूर्ण सेवा के लिए मजबूत नेटवर्क, सब-स्टेशन, प्रशिक्षित स्टाफ, एससीएडीए सिस्टम और पर्याप्त वित्तीय क्षमता जरूरी है, लेकिन आवेदनकर्ता कंपनी ने अपनी तकनीकी और व्यावसायिक क्षमता का पर्याप्त प्रमाण नहीं दिया है।



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