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फाजिल्का जिले में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जिसने सिस्टम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 24 अप्रैल को गांव घल्लू के नजदीक नहर से एक लावारिस व्यक्ति का शव बरामद हुआ था। थाना खुईखेड़ा पुलिस ने समाजसेवी संस्था नर सेवा नारायण सेवा सोसाइटी के सहयोग से शव को नहर से बाहर निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए अबोहर के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया था। कई दिन बीत जाने के बाद भी जब पोस्टमार्टम नहीं हुआ, तो डॉक्टरों ने शव को फरीदकोट मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। पुलिस कर्मियों और समाजसेवी संस्था के सदस्यों ने शव को एंबुलेंस के माध्यम से फरीदकोट पहुंचाया, लेकिन वहां भी पोस्टमार्टम करने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद शव को फिर से फाजिल्का के सरकारी अस्पताल भेज दिया गया। इस तरह एक लावारिस शव को बार-बार अलग-अलग स्थानों पर भेजा जाना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। SHO प्रगट सिंह बोले- शव लेकर भटकते रहे थाना खुईखेड़ा के एसएचओ प्रगट सिंह ने बताया कि पुलिस कर्मचारी बलकार सिंह, कांस्टेबल हीरा लाल और एंबुलेंस चालक सोनू शव को लेकर इधर-उधर भटकते रहे। उन्होंने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस और समाजसेवी संस्था को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सेवादार सोनू ने बताया कि तेज गर्मी और शव से उठ रही दुर्गंध के बीच उन्हें बार-बार अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर काटने पड़े। उन्होंने संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, फाजिल्का सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर ज्योति ने बताया कि शव अब उनके अस्पताल पहुंच चुका है और उसे मोर्चरी में रखवा दिया गया है। उन्होंने कहा कि आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद शव का पोस्टमार्टम कर दिया जाएगा। हालांकि, अबोहर और फरीदकोट में पोस्टमार्टम क्यों नहीं किया गया, इस पर उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार करते हुए इसे वरिष्ठ अधिकारियों का विषय बताया।
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फाजिल्का में लावारिस शव पोस्टमार्टम के लिए भटका:अबोहर से फरीदकोट और फिर वापस भेजा, SHO बोले- काफी परेशानी का सामना करना पड़ा







