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फर्जी पेस्टीसाइड कंपनी चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश:कुरुक्षेत्र पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत 3 पकड़े; डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का देते थे झांसा




कुरुक्षेत्र पुलिस ने पेस्टीसाइड और फर्टिलाइजर की फर्जी कंपनी बनाकर डिस्ट्रीब्यूटरशिप का झांसा देकर करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी समेत 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से ठगी की रकम से खरीदी गई कार, बाइक, सोने के जेवर, 9 मोबाइल फोन, कंप्यूटर, नकली लेबल लगी पेस्टीसाइड और फर्टिलाइजर की दवाइयां, पैकेजिंग सामग्री और करीब 1.15 लाख रुपए कैश बरामद हुआ। इस धोखाधड़ी की राशि से यह सब खरीदा था। डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का देते थे झांसा पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने फर्जी कंपनी तैयार कर कई राज्यों के लोगों को डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का झांसा दिया। बड़े मुनाफे और कारोबार का लालच देकर उनसे मोटी रकम ली गई। लोगों का भरोसा जीतने के लिए नकली लेबल, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री तैयार कराई गई, ताकि कंपनी असली लगे। म्यूल अकाउंट से खुली ठगी की परतें साइबर थाने के कार्यकरी इंचार्ज SI हरीश कुमार ने बताया कि साइबर टीम को जांच के दौरान एक म्यूल अकाउंट में संदिग्ध तरीके से बड़ी रकम के लेनदेन की जानकारी मिली थी। जांच में सामने आया कि इस खाते के खिलाफ पहले से तीन शिकायतें दर्ज हैं। इसके बाद तकनीकी साक्ष्यों, बैंक खातों और ट्रांजेक्शन की जांच शुरू की गई। मुख्य आरोपी पहले काबू, फिर डिजाइनर भी पकड़ा पुलिस टीम ने पहले कैथल निवासी विक्रम सिंह और शिवम को गिरफ्तार किया। उनको कोर्ट में पेश 6 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया। पूछताछ में करनाल के बसंत विहार निवासी सुखराज का नाम सामने आया, जिसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। सुखराज फर्जी कंपनी के लिए लेबल, पैकेजिंग और प्रचार सामग्री की एडिटिंग व डिजाइनिंग करता था। कई स्टेट के लोगों को बनाया निशाना जांच में सामने आया कि आरोपी अलग-अलग स्टेट के लोगों से संपर्क कर उन्हें कंपनी का डिस्ट्रीब्यूटर बनाने का ऑफर देते थे। आकर्षक मुनाफे और बड़े कारोबार का भरोसा दिलाकर उनसे पैसे जमा करवाए जाते थे। इसके लिए फर्जी दस्तावेज, नकली लेबल और प्रचार सामग्री का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि लोगों को कंपनी पर भरोसा हो जाए। जांच अभी जारी, और खुलासे संभव SI हरीश कुमार ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। यह पता लगाया जा रहा है कि ठगी का नेटवर्क कितना बड़ा है, कितने लोगों को निशाना बनाया गया और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस इस पूरे आर्थिक नेटवर्क और लेनदेन की भी जांच कर रही है। अभी कोई पीड़ित सामने नहीं आया है।



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