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फरीदाबाद में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.13 करोड़ रुपए की साइबर ठगी के मामले में बल्लभगढ़ थाना पुलिस टीम ने ठगी की रकम प्राप्त करने वाले एक बैंक खाताधारक को राजस्थान के जयपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान ऐश्वर्य वर्धन (23) निवासी भांकरोटा, जयपुर के रूप में हुई है। अदालत में पेश करने के बाद उसे छह दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस प्रवक्ता यशपाल के अनुसार, सेक्टर-64C निवासी एक कारोबारी के साथ जनवरी 2026 में डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर 2.13 करोड़ की ठगी की गई थी। शिकायत मिलने के बाद 9 फरवरी को साइबर थाना बल्लभगढ़ में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। बैंक खातों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जयपुर से आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी के खाते में आए थे 5.10 लाख रुपए जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी के बैंक खाते में ठगी की 5 लाख 10 हजार रुपए की रकम ट्रांसफर हुई थी। आरोपी ने अपना बैंक खाता साइबर ठगों को इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध कराया था। पुलिस के अनुसार वह जयपुर की एक निजी कंपनी में कार्यरत है। पुलिस ने बचाए 1.05 करोड़ रुपए मामला दर्ज होते ही साइबर थाना बल्लभगढ़ की टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए विभिन्न बैंक खातों की जांच की और संबंधित बैंकों के बातचीत कर 1 करोड़ 5 लाख रुपए की राशि तत्काल फ्रीज करा दी। बाद में यह पूरी राशि शिकायतकर्ता के बैंक खाते में वापस ट्रांसफर करा दी गई। अधिकारी बनकर किया था संपर्क जांच में सामने आया कि 13 जनवरी को पीड़ित की पत्नी को एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड से जुड़े बैंक खाते का इस्तेमाल 20 लाख रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है। इसके बाद कॉल को कथित मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारियों से जोड़ दिया गया। ठगों ने पति-पत्नी को लगातार वीडियो कॉल पर रखा और उन्हें घर से बाहर न निकलने तथा किसी से संपर्क न करने की हिदायत दी। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उन पर लगातार मानसिक दबाव बनाया गया। ईडी और सुप्रीम कोर्ट के नाम से भेजे फर्जी आदेश 15 जनवरी को ठगों ने ईडी के नाम से फर्जी फ्रीजिंग फंड्स कंट्रोल ऑर्डर और अरेस्ट ऑर्डर भेजे। अगले दिन सुप्रीम कोर्ट के नाम से एक और फर्जी पत्र भेजकर बैंक खातों की राशि जांच के लिए बताए गए खातों में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। साथ ही 48 से 72 घंटे में पूरी रकम लौटाने का झूठा भरोसा भी दिया गया। डर के कारण पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों में कुल 2 करोड़ 13 लाख 16 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगों ने सुप्रीम कोर्ट के नाम से फर्जी एनओसी और पीसीसी भी भेज दिए। जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी तो सभी मोबाइल नंबर बंद मिले, जिसके बाद उसने पुलिस से शिकायत की।
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