पानीपत की अतिरिक्त सत्र न्यायालय (फास्ट ट्रैक कोर्ट) में धोखाधड़ी और जालसाजी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति ने खुद को दूसरा व्यक्ति बताकर और एक मृत व्यक्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर आरोपी की जमानत लेने का प्रयास किया। अदालत ने इस फर्जीवाड़े को गंभीरता से लेते हुए आरोपी के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। ये है पूरा मामला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश चौधरी की अदालत में एनडीपीएस (NDPS) मामले में नामजद आरोपी लकी की जमानत के लिए सुखबीर नाम के एक व्यक्ति ने जमानत बॉन्ड पेश किए थे। शक होने पर अदालत ने संबंधित थाना प्रभारी (SHO) से इस बारे में वेरिफिकेशन रिपोर्ट मांगी थी। पुलिस रिपोर्ट में हुआ सनसनीखेज खुलासा बुधवार को जब एसएचओ की रिपोर्ट अदालत में पेश हुई, तो सच्चाई जानकर सभी दंग रह गए। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि जिस सुखबीर पुत्र जिले सिंह के नाम से जमानत दी जा रही थी, उसकी पहले ही मृत्यु हो चुकी है। अदालत में सुखबीर बनकर जो व्यक्ति पेश हुआ था, उसका असली नाम अजीत है। आरोपी अजीत ने खुद को गांव गांजबड़ निवासी सुखबीर के रूप में पेश कर अदालत के साथ धोखाधड़ी की और जाली दस्तावेजों का सहारा लिया। जमानत रद्द, अब दर्ज हुआ नया केस अदालत ने तथ्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी लकी के बेल बॉन्ड और श्योरिटी बॉन्ड को तुरंत प्रभाव से खारिज कर दिया। अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि आरोपी अजीत के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। इस संबंध में सभी प्रासंगिक दस्तावेज संबंधित एसएचओ को भेज दिए गए हैं। धाराओं के तहत कार्रवाई अदालत के आदेश पर पुलिस ने आरोपी अजीत के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा (प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी) और 318(4) (धोखाधड़ी) के तहत मुकदमा नंबर दर्ज कर लिया है। अगली सुनवाई मार्च में अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 मार्च की तारीख तय की है, जिसमें आरोपी लकी की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएगी। पुलिस अब उस बहुरूपिये अजीत की तलाश कर रही है जिसने कानून की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की।
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