हरियाणा के पानीपत जिले के चांदनीबाग थाना क्षेत्र में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने कानूनी और सामाजिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। यह मामला न केवल भारी-भरकम रकम की धोखाधड़ी से जुड़ा है, बल्कि इसमें न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और गवाहों द्वारा सौदेबाजी करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले के केंद्र में आसाराम बापू केस का गवाह महेंद्र चावला है। जिस पर पानीपत पुलिस ने षड्यंत्र रचकर लाखों रुपए हड़पने का मुकदमा दर्ज किया गया है। मामला दर्ज करने के तीसरे दिन सीआईए टीम ने महेंद्र चावला, इनके भाई देवेंद्र चावला समेत कुछ तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। हालांकि चांदनीबाग पुलिस ने भगत सिंह नामक व्यक्ति की शिकायत पर महेंद्र चावला, देवेंद्र चावला, उनकी माता गोपाली देवी और भतीजे राम(पुत्र देवेंद्र) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। पड़ोस की धर्म चर्चा से शुरू हुआ ठगी का ताना-बाना इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई। शिकायतकर्ता भगत सिंह ने पुलिस को बताया कि उनके पुराने मित्र पूर्ण शर्मा, जो पानीपत के सेक्टर-24 में रहते हैं, उनके घर के पास ही एक मंदिर है जिसकी देखरेख पूर्ण शर्मा का परिवार करता है। इसी मंदिर में देवेंद्र चावला, उसकी पत्नी और माता गोपाली देवी अक्सर सुबह-शाम आया करते थे। गोपाली देवी ने पूर्ण शर्मा को एक मौजिज और धार्मिक व्यक्ति बताते हुए भावनात्मक जाल बुना। उन्होंने आग्रह किया कि उनके परिवार पर पिछले 15 वर्षों से कई मुकदमे चल रहे हैं, जिसमें गांव के सरपंच संजय त्यागी और पूर्व सरपंचों के साथ विवाद शामिल हैं। उन्होंने दुहाई दी कि उनकी उम्र हो चुकी है और वह मरने से पहले अपने परिवार को इन विवादों से मुक्त देखना चाहती हैं। न्यायिक सौदेबाजी- खर्चा दिला दो, हम फेवर में गवाही देंगे शिकायत के अनुसार, चावला परिवार ने पूर्ण शर्मा और भगत सिंह को बताया कि इन मुकदमों में उनका एक करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो चुका है। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि यदि उन्हें इस खर्चे की भरपाई करवा दी जाए, तो महेंद्र चावला कोर्ट में सच्चाई बताकर विपक्षियों (सरपंचों और अन्य) के हक में गवाही दे देगा। भगत सिंह और पूर्ण शर्मा ने उन पर विश्वास करते हुए सामाजिक दबाव डलवाकर कई कार्य करवाए। जिनमें पूर्व सरपंच प्रियंका शर्मा द्वारा महेंद्र चावला के खिलाफ दर्ज केस में 27 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट में फेवर में जवाबदावा जमा करवाया गया। महेंद्र चावला ने पूर्व सरपंच सुरेंद्र शर्मा के खिलाफ दर्ज एक FIR में समझौते के लिए 101 रुपए के स्टाम्प पेपर पर हस्ताक्षर किए और नोटरी से प्रमाणित करवाया। 70 लाख रुपए की पहली किस्त और सीसीटीवी का सुबूत इन समझौतों और गवाही के बदले में 70 लाख रुपए की राशि तय हुई। शिकायतकर्ता का दावा है कि 01 मार्च 2026 की शाम को महेंद्र चावला के कहने पर उसका भाई देवेंद्र चावला और उसका पुत्र राम पूर्ण शर्मा के घर से यह 70 लाख रुपए लेकर गए। इस पूरी घटना की CCTV फुटेज पुलिस को सौंप दी गई है। हैरानी की बात यह है कि मोबाइल रिकॉर्डिंग में देवेंद्र चावला ने खुद स्वीकार किया है कि उसने 10 लाख रुपए अपने पास रखे और 60 लाख रुपए भाई महेंद्र चावला को दे दिए। उसी रात महेंद्र चावला ने फोन पर 39 मिनट तक बात करके आश्वासन दिया कि अगले दिन वह कोर्ट में सच्ची गवाही (विपक्ष के पक्ष में) देगा। कोर्ट में पलटा गवाह: गिरफ्तारी के वारंट तक पहुंची नौबत 2 मार्च 2026 को जब गवाही की बारी आई, तो महेंद्र चावला अपनी बात से मुकर गया। उसने कोर्ट में गोलमोल बयान दिए और अपने ही परिचितों को पहचानने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने 5 मार्च को कोर्ट में पेश न होने के लिए झूठा मेडिकल सर्टिफिकेट भिजवाया। अदालत ने उसकी इस हरकत पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा गवाह दुर्भावनापूर्ण इरादे से गवाही दर्ज कराने में देरी कर रहा है। कोर्ट ने उसका मेडिकल आवेदन खारिज करते हुए 19 मार्च 2026 के लिए महेंद्र चावला के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए। 80 लाख की अतिरिक्त मांग और ब्लैकमेलिंग का खेल शिकायतकर्ता के अनुसार, जब महेंद्र चावला को लगा कि वह कोर्ट के शिकंजे में फंस रहा है, तो उसने एक नया दांव चला। 16 मार्च की रात वह फिर पूर्ण शर्मा के घर पहुंचा और दबाव बनाया कि सरपंच संजय त्यागी से उसकी अवैध दुकान और मकान न गिराने का प्रस्ताव (रेसोलुशन) पंचायत में पास करवाया जाए। सामाजिक दबाव में यह रेसोलुशन 17 मार्च को पास करवा लिया गया। इतना सब होने के बाद भी महेंद्र चावला ने 18 मार्च को 80 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग कर डाली। उसने धमकी दी कि यदि अगले दिन (19 मार्च) सुबह तक उसे यह पैसे नहीं मिले, तो वह कोर्ट में सबके खिलाफ झूठी गवाही देकर उन्हें फंसा देगा। उसने खुद ही यह कबूला कि वह पहले भी वर्ष 2014 में ऋषिपाल नामक एक कानूनगो को भ्रष्टाचार के झूठे केस में फंसाकर पैसे वसूल चुका है। उसने कहा कि सरपंच और वकील करोड़पति हैं, उनके लिए 80 लाख रुपए कोई बड़ी बात नहीं है। अवैध वसूली और जालसाजी: पुलिस की जांच में गंभीर खुलासे जब भगत सिंह और पूर्ण शर्मा ने अतिरिक्त 80 लाख रुपए देने से इनकार कर दिया, तो महेंद्र चावला ने 19 मार्च को कोर्ट में अपनी पुरानी गवाही बदलकर सबके खिलाफ बयान दे दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाने शुरू किए।
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पानीपत में आसाराम केस के गवाह महेंद्र चावला गिरफ्तार:ब्लैकमेल कर हड़पे ₹70 लाख, गवाहों की खरीद-फरोख्त हुई, भाई-भतीजा भी राउंडअप
