पटियाला जिले में ‘द महाराजा भूपिंदर सिंह पंजाब स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी’ द्वारा पंजाब की लोक खेलों पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए उपकुलपति प्रो. पुष्पिंदर सिंह गिल ने कहा कि लोक खेलें केवल शारीरिक गतिविधियाँ नहीं, बल्कि हमारे इतिहास की जीवंत धरोहर हैं। उन्होंने इन्हें पंजाबी मानसिकता की ‘चढ़दी कला’ का प्रतीक बताया। बारादरी स्थित प्रभात परवाना मेमोरियल ट्रेड यूनियन सेंटर में आयोजित सेमिनार में प्रो. गिल ने आधुनिक खेलों और लोक खेलों की तुलना की। उन्होंने कहा कि जहां आधुनिक खेल वैश्विक पहचान के लिए आवश्यक हैं, वहीं स्थानीय लोक खेलें बुनियादी ताकत और सामुदायिक एकता प्रदान करती हैं, जिसकी बराबरी कोई आधुनिक खेल नहीं कर सकता।
बैलगाड़ियों की दौड़ की सराहना की प्रो. गिल पंजाब सरकार द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में किला रायपुर में बैलगाड़ियों की दौड़ को पुनः शुरू करने के कदम की सराहना की। उन्होंने इसे विरासत खेलों को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। अकादमिक पाठ्यक्रम का औपचारिक हिस्सा बनाने पर किया काम उपकुलपति ने यह भी जानकारी दी कि लोक खेलों को अकादमिक पाठ्यक्रम का औपचारिक हिस्सा बनाने पर काम किया जाएगा। उनका उद्देश्य है कि पंजाब का हर बच्चा ‘गतका’ सीखने में उतना ही गर्व महसूस करे, जितना वह किसी ओलंपिक खेल में करता है। कई कदम उठाने पर दिया जोर दिया उपकुलपति ने इन खेलों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए संस्थागत स्तर पर कई कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। मुख्य अतिथि हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि लोक खेलें हमें अपनी जड़ों से जोड़ती हैं। उन्होंने खेलों को केवल जीतने का माध्यम न मानकर सीखने का जरिया बताया। डॉ. गुरभजन गिल ने भी अपने विचार रखे डॉ. सिंह ने यह भी उल्लेख किया कि आधुनिक संगठित खेल जहां जटिल और महंगे होते जा रहे हैं, वहीं लोक खेलें आज भी सरल, सस्ती और प्रभावी बनी हुई हैं। सेमिनार में विशिष्ट शख्सियत डॉ. गुरभजन गिल ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का प्रभाव बढ़ रहा है और वैश्वीकरण ने मानव जीवन पर गहरा असर डाला है।
Source link
पटियाला में लोक खेलों पर राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन:सामाजिक एकता और परंपरा का बताया आधार, बैलगाड़ी दौड़ शुरू करने पर सराहना
