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मोहाली स्थित सीबीआई कोर्ट ने पंजाब के चर्चित IG गौतम चीमा मामले में फैसला सुनाते हुए सभी 6 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने 20 दिसंबर 2024 को निचली अदालत द्वारा सुनाए गए दोषी करार और सजा के आदेश को रद्द कर दिया। मंगलवार को सुनाए गए फैसले में अदालत ने साफ कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा। इसलिए आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया जाता है। निचली अदालत के फैसले पर उठाए सवाल अदालत ने अपने आदेश में कहा कि निचली अदालत का फैसला तार्किक रूप से कमजोर और असंगत था। कोर्ट ने पाया कि जिन सबूतों और तथ्यों के आधार पर गंभीर आरोपों को खारिज किया गया, उन्हीं कमजोर आधारों को दूसरी धाराओं में सजा देने के लिए इस्तेमाल किया गया, जो कानूनन सही नहीं है। अदालत ने कहा कि जब मुख्य आरोप ही मजबूत सबूतों से साबित नहीं हुए, तो उसी आधार पर दूसरी धाराओं में सजा देना सही नहीं है। इसी कारण निचली अदालत का फैसला गलत मानते हुए उसे रद्द कर दिया गया। जानिए क्या था पूरा मामला यह मामला 26 अगस्त 2014 की रात का है। आरोप था कि उस समय पंजाब के तत्कालीन आईजी Gautam Cheema अपने साथियों के साथ मोहाली फेज-1 थाने पहुंचे और पुलिस हिरासत में मौजूद भगोड़े आरोपी सुमेध गुलाटी को जबरन छुड़ा लिया। शिकायत के अनुसार, उसे फेज-6 के मैक्स अस्पताल ले जाया गया, जहां उसके साथ मारपीट की गई और एक महिला को शिकायत वापस लेने के लिए धमकाया गया। बाद में पुलिस टीम अस्पताल पहुंची और सुमेध गुलाटी को फिर से हिरासत में ले लिया। इस मामले में 30 अगस्त 2014 को फेज-1 थाना मोहाली में केस दर्ज हुआ था। बाद में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। 40 से ज्यादा गवाह, लेकिन केस कमजोर पड़ा ट्रायल के दौरान 40 से ज्यादा गवाह अदालत में पेश हुए, लेकिन ज्यादातर अहम गवाह अपने पहले दिए गए बयान से मुकर गए। कई गवाहों ने अदालत में घटना की पुष्टि नहीं की और न ही किसी आरोपी की पहचान कर पाए, जिससे केस कमजोर पड़ गया। अदालत ने यह भी पाया कि यह साफ तौर पर साबित नहीं हो सका कि सुमेध गुलाटी को पहले पीसीआर टीम ने गिरफ्तार किया था या फिर उसे थाने से छुड़ाया गया था। इसके अलावा पुलिस रिकॉर्ड में गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़ी जरूरी एंट्रियां और दस्तावेज भी नहीं मिले, जिससे पूरे मामले पर संदेह पैदा हो गया। अदालत की सख्त टिप्पणी अदालत ने कहा कि केस में गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े पक्के और स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिले। पहचान परेड भी नहीं करवाई गई, जिससे आरोपियों की सही पहचान साबित नहीं हो सकी। इसके अलावा गवाहों के बयान भी आपस में मेल नहीं खाते, जिससे केस और कमजोर हो गया। इन्हीं कमियों को देखते हुए अदालत ने माना कि आरोप ठोस सबूतों से साबित नहीं हो पाए। इसलिए सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
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पंजाब IG गौतम चीमा केस में सभी आरोपी बरी:CBI अदालत ने लोअर कोर्ट का फैसला पलटा, 40 से ज्यादा गवाह; केस कमजोर पड़ा







