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पंजाब सरकार ने अकाल तख्त को सौंपा संशोधित ड्राफ्ट:बेअदबी कानून पर रखा अपना पक्ष; MLA निज्जर बोले-मसौदे पर बताई आपत्तियां की दूर




पंजाब सरकार ने बुधवार को श्री अकाल तख्त साहिब को बेअदबी रोकथाम कानून के आपत्तिजनक प्रावधानों पर संशोधित ड्राफ्ट सौंपा। विधायक डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर और डीसी दलविंदरजीत सिंह ने सरकार का पक्ष और संशोधित मसौदा (ड्राफ्ट) श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय में प्रभारी बगीचा सिंह को सौंप दिया। मीडिया से बातचीत में डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से बेअदबी रोकथाम कानून के मसौदे पर जो भी आपत्तियां जताई गई थीं, उन्हें पंजाब सरकार ने संशोधित ड्राफ्ट में दूर कर दिया है। अब यह मसौदा श्री अकाल तख्त साहिब सचिवालय के पास है, जहां इसका अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद सचिवालय की ओर से जो भी निर्णय या सुझाव आएगा । डॉ. निज्जर ने बताया कि दस्तावेज सौंपे जाने के समय जत्थेदार साहिब मौजूद नहीं थे। जत्थेदार ने बताए थे ये 6 एतराज बीड़ की जगह स्वरूप कहने पर एतराज: जत्थेदार ने कहा था कि कानून में बीड़ की जगह स्वरूप शब्द का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा था कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के लिए बीड़ शब्द कहा जाता है। स्वरूप भी सिख शब्दावली का हिस्सा है, लेकिन विधानसभा को सिख शब्दावली बदलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा था कि यदि बीड़ के साथ स्वरूप लिखा जाता तो कोई एतराज नहीं होता। कस्टोडियन वाली धारा हटाने की मांग: जत्थेदार ने कहा था कि कस्टोडियन (संभालकर्ता) शब्द तय करना सरकार का अधिकार नहीं है। किसे श्री गुरु ग्रंथ साहिब का स्वरूप देना है और किसे नहीं, यह फैसला पंथ और श्री अकाल तख्त साहिब का अधिकार है। इसलिए कस्टोडियन संबंधी धारा हटाने की मांग की गई थी। यूनिक नंबर पर एतराज: जत्थेदार ने कहा था कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों का रजिस्टर पहले से मौजूद है। उन्होंने यूनिक नंबर लगाने पर एतराज जताते हुए कहा था कि सिख रहित मर्यादा के अनुसार गुरमत संबंधी फैसले पंथ करता है, विधानसभा नहीं। सरकार सुझाव दे सकती है, लेकिन आदेश नहीं दे सकती। वेबसाइट पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब का रिकॉर्ड जारी करने पर भी आपत्ति जताई गई थी। कस्टोडियन के फर्ज तय करने पर एतराज: जत्थेदार ने कहा था कि कस्टोडियन की जिम्मेदारियां और फर्ज तय करना विधानसभा का अधिकार नहीं है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब को किस प्रकार रखना और उनकी सेवा-संभाल कैसे करनी है, इसका निर्णय केवल पंथ कर सकता है। सरकार केवल सुझाव दे सकती है। सजा संबंधी प्रावधान पर एतराज: जत्थेदार ने कहा था कि बेअदबी करने वालों को सजा देना सरकार का अधिकार है, लेकिन कानून में “बेअदबी करने के अलावा” शब्दों का क्या अर्थ है और यह किसके लिए लागू होंगे, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। कस्टोडियन को सजा देने संबंधी प्रावधान पर भी श्री अकाल तख्त साहिब ने आपत्ति जताई थी। दुर्घटना की स्थिति का जिक्र नहीं होने पर एतराज: जत्थेदार ने कहा था कि कानून में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यदि किसी दुर्घटना की स्थिति बनती है तो श्री गुरु ग्रंथ साहिब को केस प्रॉपर्टी नहीं बनाया जाएगा। अंत में श्री अकाल तख्त साहिब ने आदेश दिया था कि सरकार एक महीने के भीतर इन सभी आपत्तियों को दूर करे। अकाल तख्त के बारे में जानिए:-



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