केंद्र सरकार द्वारा अपने लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ता (डीए) 1 जनवरी से 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने के निर्णय से जहां केंद्रीय कर्मचारियों को राहत मिली है, वहीं पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में असंतोष बढ़ गया है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि पंजाब में भगवंत मान सरकार पिछले 4 वर्षों से महंगाई भत्ते की किस्तें जारी करने में पीछे है। वर्तमान में पंजाब के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को केवल 42 प्रतिशत डीए मिल रहा है, जो केंद्र सरकार और अन्य कई राज्यों की तुलना में काफी कम है। उन्हें 18 प्रतिशत डीए बकाया है। कोर्ट ने महंगाई भत्ता जारी करने के दिए आदेश अपने अधिकारों की मांग को लेकर कर्मचारी और पेंशनभोगी लगातार संघर्ष कर रहे हैं। इस संबंध में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कई सिविल रिट याचिकाएं भी दायर की गई हैं। हाल ही में 8 अप्रैल को कोर्ट ने पंजाब सरकार को बकाया महंगाई भत्ता जारी करने के लिए अंतरिम आदेश दिए हैं। 18 प्रतिशत डीए जारी करने की मांग पंजाब सबऑर्डिनेट सर्विसेज फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष रणजीत सिंह राणवां, महासचिव सुरिंदर कुमार पुआरी, मुख्य संगठन सचिव जगदीश सिंह चाहल और अतिरिक्त महासचिव प्रेम चावला ने सरकार से मांग की है कि कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बकाया 6 किस्तों के रूप में बनता 18 प्रतिशत डीए तुरंत जारी किया जाए। इन नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया, तो आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को इसका परिणाम भुगतना पड़ सकता है।
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पंजाब में बकाया 18 प्रतिशत डीए के भुगतान की मांग:मोगा में कर्मचारी संगठनों का विरोध, कहा- चुनाव में विरोध की चेतावनी
