spot_imgspot_img

Top 5 This Week

spot_img

Related Posts

पंजाबी महिला अमेरिका की जेल में कैद:35 साल बाद अचानक गिरफ्तार, एयरपोर्ट पर हथकड़ी लगाई; बेटा US आर्मी में अफसर




अमेरिका के टेक्सास में गिरफ्तार पंजाबी मूल की कोर्ट इंटरप्रेटर मीनू बत्रा पर डिपोर्टेशन की तलवार लटकी है। 17 मार्च से मीनू टेक्सास की जेल में बंद हैं। अमेरिकन इमिग्रेशन एजेंसी उन्हें डिपोर्ट करने पर अड़ी है, वहीं उनके वकील अलग-अलग कानूनों का हवाला देकर उनका डिपोर्टेशन रोकने में जुटे हैं। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि वो 21 अप्रैल तक अपना जवाब फाइल करें। सरकार ने टेक्सास की कोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया है। कोर्ट ने अभी उनके डिपोर्टेशन के ऑर्डर जारी नहीं किए। मीनू बत्रा पर आरोप हैं कि वो इमिग्रेशन कानून का उलंघन करते हुए कई सालों से अमेरिका में रह रही हैं। ट्रंप सरकार ने मास डिपोर्टेशन ड्राइव शुरू की है। अमेरिका में अवैध तरीके से रहने वाले लोगों को डिपोर्ट किया जा रहा है। उसके तहत ही मीनू बत्रा को भी गिरफ्तार किया गया है। हालांकि मीनू बत्रा के वकील का तर्क है कि मीनू के पास ‘विदहोल्डिंग ऑफ रिमूवल’ की कानूनी सुरक्षा है। पूर्व में कोर्ट स्पष्ट कर चुकी है कि मीनू बत्रा को भारत नहीं भेजा जा सकता है वो अमेरिका में रहकर काम कर सकती हैं। लेकिन उन्हें ग्रीन कार्ड नहीं मिलेगा। मीनू टेक्सास की कोर्ट में पंजाबी, हिंदी और उर्दू की अकेली कोर्ट इंटरप्रेटर हैं। वह 35 साल से अमेरिका में रह रही हैं। उनका बड़ा बेटा अमेरिका की सेना में अधिकारी है। कब क्या हुआ और क्यों फंसीं मीनू, सिलसिलेवार जानिए… सोशल मीडिया के लिए खिंचवाई फोटो
मीनू बत्रा के वकील दीपक आहलूवालिया ने कहा कि अधिकारियों ने उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार किया। उन्होंने जबरन मीनू के हाथ पीछे करवाकर फोटो खिंचवाई ताकि वह अपराधी लगें और कहा कि यह सोशल मीडिया के लिए है। जेल के अंदर मीनू अब अन्य महिलाओं की मदद कर रही हैं, जो अंग्रेजी नहीं जानतीं। वे बताती हैं कि वहां लोग डिप्रेशन में हैं और कई ने आत्महत्या की कोशिश भी की है। सरकार का तर्क, मीनू के पास नहीं है नागरिकता
कोर्ट में डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) का कहना है कि मीनू के पास 2000 का फाइनल रिमूवल ऑर्डर है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्क परमिट होने का मतलब यह नहीं है कि कोई अमेरिका में कानूनी रूप से हमेशा रह सकता है। सरकार अब प्रवासियों को सेल्फ डिपोर्ट के लिए कह रही है। कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया
दीपक आहलूवालिया का कहना है कि विदहोल्डिंग ऑफ रिमूवल मिलने के बाद इसे दो तरीकों से ही वापस लिया जा सकता है। यदि किसी ने अपराध किया हो तो आईसीई यह मोशन फाइल कर सकती है कि इसे वापस लिया जाए। दूसरा है ‘कंट्री कंडीशन’ फाइल किया जाना, जिसमें कहा जाता है कि हालात अब बदल गए हैं और मीनू को अपने मूल देश में कोई खतरा नहीं है। उनका कहना है कि इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा ऐसा कोई भी मोशन फाइल नहीं किया गया और न ही 26 वर्षों के दौरान आईसीई द्वारा उन्हें कोई नोटिस भेजा गया। मीनू बत्रा के पक्ष में आए ये लोग
अमेरिकन ट्रांसलेटर्स एसोसिएशन पर मौजूद मीनू बत्रा की प्रोफाइल के मुताबिक उनके पास टेक्सास स्टेट से मास्टर लेवल कोर्ट इंटरप्रेटर का लाइसेंस मौजूद है। स्थानीय राजनेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अनुवादकों के संगठनों ने भी मीनू को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ आवाज उठाई है। मीनू बत्रा टेक्सास एसोसिएशन ऑफ ज्यूडिशियरी इंटरप्रेटर्स एंड ट्रांसलेटर्स’ (TAJIT) की बोर्ड मेंबर भी रह चुकी हैं।



Source link

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Popular Articles