हरियाणा के पंचकूला में मेयर चुनाव घोषित होते ही अब पार्टी सिंबल की जोर आजमाइश शुरू हो गई है। पंचकूला में कांग्रेस-BJP के नेताओं ने अब दिल्ली-चंडीगढ़ की भागदौड़ शुरू कर दी है। कांग्रेस सिंबल के लिए 13 तथा BJP के लिए 20 वर्करों ने आवेदन किया है। पंचकूला में जातीय समीकरणों की बात की जाए तो पंजाबी और वैश्य बिरादरी के वोटरों की संख्या सबसे अधिक है। इसलिए दोनों पार्टियां अपनी प्रत्याशी का चयन भी इन्हीं दोनों समुदायों से आमतौर पर करती रहीं हैं। विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो छह चुनाव से भाजपा वैश्य बिरादरी पर दांव खेलती रही है। पंचकूला में वैश्य-पंजाबी के समीकरण के इर्द-गिर्द ही चुनाव घूमता रहा है। हालांकि BJP नए प्रयोग के लिए किसी ब्राह्मण चेहरे को भी अपना प्रत्याशी बना सकती है। लेकिन कांग्रेस में स्थितियां स्पष्ट हैं। कांग्रेस पंजाबी या फिर ब्राह्मण चेहरे पर ही दांव खेलेगी। कांग्रेस-भाजपा टिकट के लिए ये कर रहे हैं प्रयास पंचकूला मेयर चुनाव टिकट के लिए सबसे अधिक मारामारी BJP में चल रही है। पूर्व मेयर कुलभूषण गोयल, प्रवक्ता रंजीता मेहता, पूर्व जिला प्रधान श्यामलाल बंसल, दीपक शर्मा और अनिल थापर भी टिकट की रेस में हैं। वहीं कांग्रेस में वैसे तो 13 लोगों ने टिकट मांगा है लेकिन मुख्य तौर पर पूर्व चेयरमैन रविंद्र रावल व महिला कांग्रेस की प्रदेश प्रधान सुधा भारद्वाज का नाम ही सामने आ रहा है। 2020 में हुआ था करीबी मुकाबला पंचकूला मेयर चुनाव 2020 में कांग्रेस-BJP के बीच कांटे का मुकाबला हुआ था। जिसमें 2057 वोट से भाजपा के कुलभूषण गोयल मेयर पद का चुनाव जीत गए । उन्होंने कांग्रेस की उपिंदर आहलूवालिया को मात दी। पंचकूला में पार्षद पद के लिए हुए चुनाव में भाजपा को 9 सीटों पर जीत मिली। कांग्रेस ने सात सीटों पर जीत हासिल की है। 2 सीटें जजपा के खाते में आई और दो सीटों पर आजाद प्रत्याशी जीते। निर्विवाद रहा कुलभूषण का कार्यकाल
पंचकूला के पूर्व मेयर कुलभूषण गोयल के कार्यकाल के दौरान शहर में काफी विकास कार्य हुए हैं। गोयल ने 5 साल के दौरान विभाग से मिलने वाली सैलरी-भत्ते भी नहीं स्वीकार किए। वहीं गाड़ी का भी प्रयोग नहीं किया। उनके कार्यकाल के दौरान ऐसा कोई विवाद भी नहीं जुड़ा है।
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