हरियाणा के पंचकूला में पंच बनने को लेकर अब लोगों का रुझान कम होता नजर आ रहा है। 13 पंचायतों के 23 वार्डों में हो रहे उपचुनाव में बेहद कम दिलचस्पी देखने को मिली है। स्थिति यह रही कि कुल 23 वार्डों में से सिर्फ 4 वार्ड ऐसे रहे, जहां एक-एक आवेदन ही प्राप्त हुआ। बाकी वार्डों में या तो कोई नामांकन करने के लिए ही नहीं पहुंचा। चुनाव आयोग के द्वारा बनाए गए रिटर्निंग ऑफिसर के पास बरवाला ब्लॉक के बतौड़ गांव के 7 नंबर वार्ड, पिंजौर ब्लॉक के झोहलूवाल के वार्ड-6 व करणपुर टांडा गांव के वार्ड-2 तथा रायपुर ब्लॉक के भांवली गांव के वार्ड एक से 1-1 आवेदन आया है। इस बार नामांकन के दौरान अपेक्षित संख्या में उम्मीदवार सामने नहीं आए। ग्रामीण स्तर पर पंच पद को लेकर पहले जैसी प्रतिस्पर्धा अब दिखाई नहीं दे रही है। मानदेय बढ़ने के बावजूद नहीं बढ़ा आकर्षण हरियाणा सरकार की ओर से पंचों को 1,600 रुपए प्रति माह का मानदेय दिया जा रहा है। यह राशि सीधे डिजिटल माध्यम से उनके बैंक खातों में ट्रांसफर होती है। इसके बावजूद पंच बनने के प्रति लोगों का उत्साह कम होना प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा है कि पंचों पर जिम्मेदारियां तो अधिक होती हैं, लेकिन उनके पास निर्णय लेने के अधिकार सीमित हैं। इसके अलावा मानदेय भी अपेक्षाकृत कम माना जा रहा है, जिससे लोग इस पद के लिए आगे आने से बच रहे हैं। निर्विरोध चुने जाने तय जिन 4 वार्डों में एक-एक आवेदन आया है, वहां उम्मीदवारों का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय माना जा रहा है। अन्य वार्डों में नामांकन नहीं होने की स्थिति में चुनाव प्रक्रिया को लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कम नामांकन ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। आने वाले समय में पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता बढ़ाने और पंच पद को अधिक आकर्षक बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
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