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उत्तराखंड के नगरासू में गुरुद्वारा साहिब की चौथी मंजिल पर कब्जे करके बैठे निहंग आखिरकार नीचे उतर गए हैं। उन्हें वापस पंजाब भेज दिया गया है। पंजाब से गए निहंग जत्थे ने प्रशासन के साथ बातचीत की और उसके बाद वो निहंगों से बात करने पहुंचे। जत्थे ने वहां मौजूद निहंगों से बातचीत की और उन्हें विश्वास दिलाया कि उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। इसलिए वो नीचे उतर जाएं। जत्थे के कहने पर निहंग नीचे उतरे। इससे पहले गुरुद्वारा साहिब के मुख्य सेवादार बेअंत सिंह ने निहंगों से अपील की थी कि यहां से पुलिस चली गई है आप नीचे उतर जाओ। लंगर खाकर आप पंजाब के लिए निकल जाओ। बेअंत सिंह के कहने पर वो नीचे नहीं उतरे। इससे पहले निहंगों ने सेवादार की पिटाई भी की थी। निहंगों की कोई डिमांड नहीं
सतज्ञानी हरनाम सिंह जी खालसा भिंडरावाले प्रधान संत समाज के जत्थे में शामिल निहंग ने बताया कि जब उन्हें पता चला तो वो तुरंत यहां आ गए। उन्होंने कहा कि उनकी कोई डिमांड नहीं थी। यह सब कुछ गुस्से में हो गया। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा साहिब पर कब्जे का कोई मामला नहीं था। CM धामी से मिला प्रतिनिधिमंडल
उन्होंने बताया कि बाबा बेअंत सिंह ने भी उनसे अपील की है और उसके बाद वो नीचे उतरे हैं। प्रशासन से भी इस संबंध में बात हो गई है। इसको लेकर मंगलवार को दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल ने CM पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। CM ने कहा कि कर्णप्रयाग एवं नगरासू में सामने आई घटनाओं के संबंध में निष्पक्ष कार्रवाई की जा रही है। जांच में दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई हो रही है। तथ्यों के आधार पर आगे भी कड़े कदम उठाए जाएंगे। 16 जून से अब तक क्या-क्या हुआ… 16 जून
कर्णप्रयाग बाजार में विवाद
हेमकुंड साहिब यात्रा से लौट रहे निहंगों के एक जत्थे की बाइक कर्णप्रयाग बाजार में खड़ी कार से टकरा गई। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। आरोप है कि कुछ निहंगों ने तलवार और धारदार हथियारों से हमला किया, जिसमें कई स्थानीय लोग घायल हुए। एक होटल व्यवसायी की हालत गंभीर होने पर उसे एयरलिफ्ट कर AIIMS ऋषिकेश भेजा गया। घटना के विरोध में स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने बद्रीनाथ हाईवे पर करीब पांच घंटे चक्का जाम किया। इससे गौचर से नंदप्रयाग तक लंबा जाम लग गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। 20 जून
दूसरे पक्ष पर भी FIR
सिख समुदाय ने आरोप लगाया कि निहंगों ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी, लेकिन केवल उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद घायल सिख श्रद्धालु के पिता की शिकायत पर 20 जून को अज्ञात लोगों के खिलाफ भी कर्णप्रयाग कोतवाली में FIR दर्ज की गई। इसके बाद निहंग रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में ठहरे हुए थे। उनकी नाराजगी स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन और प्रशासन की भूमिका को लेकर थी। शनिवार शाम विवाद बढ़ गया। आरोप है कि निहंगों ने गुरुद्वारे के सेवादार और एक बाबा के साथ मारपीट की और वहां मौजूद एक व्यक्ति को बंधक बना लिया। इसके बाद वे शस्त्रों के साथ गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिलों पर चले गए और खुद को अंदर बंद कर लिया। 21 जून
पुलिस घेराबंदी, आईटीबीपी तैनात
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, पीएसी और आईटीबीपी को मौके पर तैनात किया गया। प्रशासन ने गुरुद्वारे को चारों ओर से घेर लिया। डीएम विशाल मिश्रा और एसपी निहारिका तोमर ने बातचीत की कोशिश की, लेकिन शुरुआती दौर में निहंगों ने वार्ता से इनकार कर दिया। सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के क्षेत्रों में कुछ समय के लिए इंटरनेट सेवाएं भी बंद की गईं। 22 जून
बातचीत के बाद बंधक मुक्त
प्रशासन और निहंगों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। इसके बाद निहंगों ने बंधकों को मुक्त कर दिया। एक वीडियो संदेश जारी कर उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन ने उनका सहयोग किया है और वे सुरक्षित हैं। हालांकि कुछ निहंग अब भी गुरुद्वारे में डटे हुए हैं और अपने साथियों के आने का इंतजार कर रहे हैं। 23 जून
जांच हरिद्वार ट्रांसफर
आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने बड़ा फैसला लिया। कर्णप्रयाग में दर्ज दोनों एफआईआर की जांच चमोली से हरिद्वार ट्रांसफर कर दी गई। इन मामलों की निगरानी एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर करेंगे। सिख संगठनों ने आरोप लगाया है कि गिरफ्तार श्रद्धालुओं को बिना दस्तार अदालत में पेश किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। इन आरोपों की जांच डीआईजी यशवंत सिंह चौहान को सौंपी गई है। उन्हें दो हफ्ते के अंदर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
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निहंगों ने उत्तराखंड के गुरुद्वारे से कब्जा छोड़ा:पंजाब से पहुंचे जत्थे ने मनाया, 4 दिन बाद लौटे; सेवादार की पिटाई की थी







